गैंग गिरोह बन्दी में जकड़ा सर्बकल्याण ........? तीरंदाज
व्ही. एस. भुल्ले
भैया- अब तो म्हारे को भी एक अदद महान की तलाश जिसको मने भी अपना वंशज पूर्वज बता अपनी फिल्म चमका सकू और हाथो हाथ अपना नाम भी ग्रेट महान लोगो के वंशजो मे लिखवा अपनी आने बाली पीढ़ी को महान बना सकू क्योकि मने न लागे कि गैंग गिरोह बन्द माहौल मे म्हारी जीवन के प्रति कृतज्ञता कोई काम आने बाली है म्हारे को तो लागेे अब म्हारे इतिहास मे दर्ज म्हारे महानो की कीर्ति यश उनके जीवन की पीढ़ा त्याग तपस्या से पटी कृतज्ञता भी गैग गिरोह बन्द संस्कृति के चलते अब बचने बाली है क्योकि इतिहास का क्या वह तो बैचारा बैसै भी पन्नो मे निर्जीव दर्ज है और जीवंत इतिहास हमारे सामने है जिसका नवनिर्माण बड़ी ही दुत्र गति से चल रहा है मने न लागे की अब म्हारे लिये इतिहास बनाने कोई क्षैत्र दरक शेष बचने बाला है ।
भैयै - तने तो वावला शै के थारे को मालूम कोणी म्हारा समाज म्हारी संस्कृति म्हारे संस्कार म्हारा स्वाभिमान हमारी वह अनमोल धरोहर बहुमूल्य विरासत है जिस पर आज भी हर मानव को गर्व है कै त्याग तपस्या से सनी हमारी महान कीर्ति इतनी कमजोर है जो चंद गैग गिरोह बन्द लोगो द्वारा यू ही समृद्धि, खुशहाॅली, सेवा, सर्बकल्याण के नाम लूट ली जायेगी मने तो लागे तने म्हारे नव ज्ञानी विज्ञानियो मूड़धन्य कार साहित्यकारो से जलता है और इसीलिये तने म्हारे सेवक सेवियो पर कल्याण के बीच जलता है ।
भैया - मने तू ज्वलनशील पदार्थ थोडे ही हॅु जो जलने लगू भाया आग तो तेल के दामो मे लगी है आग तो रोजमर्रा की बस्तुओ मे लगी है गैग गिरोह बन्द भाई लोगो के माॅल चल रहे है लोगो को कम दाम मे क्वालिटी के सामान मिल रहै है फटीचर करोड़पति तो करोड़पति फटीचर हो रहे है कलम चोर लेखक तो लेखक हापनी भर रहै है । कलमूही सियासत ऐसी कि अब तो उसमे भी अंधे बैहरे गूगे चल रहे है मने तो बोल्यू भाया जमकर मलाई कट रही और राहत के नाम आफत लुट रही है ।
भैयै - चुप कर मुये गर किसी ने सुन लिया तो थारी तो थारी इस महान अपराध मे म्हारी भी चमड़ी उधेड़ ली जायेगी कै थारे को पुरानी कहावत मालूम कोणी कि खून का बदला खून यही चम्बल की रीत है ।
भैया - मने जाड़ू कि तने यही बोलेगा और गैग गिरोह बन्द के आगे ऐसे ही अपनी महानता के पन्ने खोलेगा । मुये ये कहावत नही फिल्मी डायलाॅग है मगर इस महान मौके पर मने तो सिर्फ इतना कहना चाहुॅ कि जिस तरह से हमारे बीच जिस तरह की महान संस्कृति पनप रही है भाया यह न तो थारे न ही म्हारे हित मे है सो मने तो काड़ू की बात सही लागे वो बोल्या गर इस जीवन मे कुछ करना है तो तने भी आॅख कान नाक जुबान को भूल और स्वाभिवान की चिता पर बैठ किसी गैग गिरोह मे शामिल हो जा और फिर महानता के दांव लगा तब तो तने महान बन जायेगा वरना यही हाल रहा तो काठी उठाने तक को तरस जायेगा बोल भैया कैसी रही ।

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