स्थापित ब्यबस्था की कब्र खोदती बैठके, जनधन हुआ निढाल
राजकोष को सबसे बड़ा खतरा राज पुरूषो से होता है
व्ही.एस. भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा
कभी चाड़क्य के शिष्य ने एक सबाल के जबाब मे धनानन्द की सभा मे हो रहै शास्त्रार्थ के दौरान कहा था लगता है सेकड़ो बर्ष बाद भी सबाल और उत्तर जस के तस है भले ही आज हम राजतंत्र का भाग न होकर लोकतंत्र के सहभागी हो मगर अब सबाल यह है कि करे तो भी क्या ? सस्ते मकान को तरसते लोग जो वोट विद्या के चलते सस्ते राशन आयुष्मान का भाग बन भगवान कहलाने लगे हो मगर जो दुरगति भगवान के आर्शीबाद और उसकी परसादी की हो रही है वह किसी से छिपी नही है वातानूकूलित कार्यालय भव्य भवन आलीशान बंगले लग्झरी वाहनो के काफिले चैपर जहाज का सैर सपाटा और बैठको का अम्बार जन जन की ब्यथा समझने काॅफी है करोड़ो अरबो के बजट परिणाम शून्य कल्याण आखिर किसके लिये क्या अब आम नागरिक की वोट और टेक्स के रूप मे नोट देना नियती बन गयी है इतना तो लोग लोकतंत्र के नाम झेल ही रहै थे कि अब सत्ता सरकार शासन की अर्कमड़यता का शुल्क भी आम नागरिक को चुकाना पढ़ रहा हैे फिर वह जगह जगह विधिसम्बत टोल टेक्स हो या फिर सुरक्षा के लिये शस्त्र रखने बाले लोग न जाने कितने टैक्स चुकाने के बाद भी टैक्सो का अन्त नही उस पर से सेवा कल्याण सर्बकल्याण का नारा समझ से परे है विकास के नाम तथाकथित गैंगबन्द जन धन के ठिये ठिकाने लगाने बालो के कारनामे देखे तो लोग दांतो तले उगली दबा लेगे अगर यो कहै कि आज भी अब राजकोष को सबसे बड़ा खतरा नही बल्कि वह शिकार हो रहा है तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी मगर बैठके है जो सर्बकल्याण मे खत्म होने का नाम ही नही ले रही अब ऐसे मे कौन किसकी व्यथा सुने और कौन किस पर भरोसा करे आज बड़ा सबाल है क्योकि जिन्दा कौमे शेष रही नही जो है वह अपने अपने मे मस्त है नैट की दुनिया मे ब्यस्थ युवा पीढ़ी को फुरसत ही कहा जो जीवन के सरोकारो पर बात करे उन्है तो सिर्फ रोजगार की दरकार है फिर वह जैसा जो भी हो कम से कम नौकरी सरकारी हो बहरहाॅल समस्या बिकट है मगर निदान शेष काश अभी भी हम जीवन सरोकारो को समझ पाये तो यह हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी जो मानव धर्म भी है और कर्म भी । जय स्वराज ।

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