आसमानी सुल्तानी सेवा कल्याण से सहमा इन्सान


खीर मे सौझ, महेरी मे नियारे की सियासत से सत्ताये हुई बलबान तो जीवन हुआ बैहाल

व्ही.एस. भुल्ले 


विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 

अर्थ बदलते सेवा कल्याण के बीच जिस तरह से आसमानी सुल्तानी सेवा कल्याण की बाढ़ आई है उससे फिलहाॅल आम इन्सान सहमा हुआ है । उस पर से खीर मे सौझ महेरी मे नियारे की परवान चड़ती सियासत से सत्ताये भले ही बलबान हुई हो और एक लम्बे अन्तराल बाद सत्ताओ मे धन दौलत व्यापार की पैठ बढ़ी हो मगर ऐसा नही कि ऐसा कोई इस दुनिया मे पहली बार हुआ है जहां जहां जब जब जो भी सत्ताये रही धन बल का मोल तो रहा ही है अगर आजाद लोकतंत्र मे सेवा कल्याण की आढ़ मे धन कबाड़ुओ का बोल बाला बढ़ रहा है तो कोई नई बात नही चैपट संस्थागत ब्यवस्था मे सेवा कल्याण की आढ़ मे लूट के अघोषित अडडे पूरे माफिया अन्दाज मे पनप रहै तो हर्ज ही क्या ? अब न तो ढूड़े से सेवक ही मिल रहै न ही कल्याण मे लीन लोग अगर यो कहे कि सबको अपनी अपनी पढ़ी है अपने अपनो की पढ़ी है तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी । विकेन्द्रिकृत व्यवस्था ने नाम सब कुछ केन्द्रियकृत होने के बाबजूद सेवा कल्याण का कारबा चल पढ़ा है सत्ता के सिपहसालारो के बूटो तले कुचलती व्यवस्था भले अभी उफ तक न करे मगर कुछ दिनो तक सेवा कल्याण का कारबा यू ही चलता रहा तो आने बाले समय मे तूफान आना तय है जिसका अन्दाजा शायद सेवको हो मगर सत्य यही है घपले घोटालो से लेकर ठेका सप्लाई निर्माण से लेकर विकास और प्राकृतिक संपदा की सुनियोजित लूट से लेकर सार्वजनिक संसाधनो के दोहन तक खुलेयाम खेल चल रहा है अगर यू कहै कि खीर मे सौझ महेरी मे नियारे अन्दाज मे मौजूद सियासत, सेवा कल्याण की आढ़ मे खूब फलफूल रही है जो न तो आम जन के हित मे है न ही स्थापित उन संस्थाओ के हित मे जिनका अस्तित्व ही उनकी निष्ठा ईमानदारी पर टिका है काश इस सच को जितनी जल्दी हम समझ जाये उतना ही सभी के हित मे होगा क्योकि स्वछन्द जीवन जिस दुराग्रह को बगैर किसी दोष के झेलने पर मजबूर बैबस है वह किसी के भी हित मे नही आज हमे यही सबसे बढ़ी समझने बाली बात होना चाहिए । जय स्वराज । 


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