जन पीढ़ा का जनाजा, मातम मनाते माईबाप ..........? तीरंदाज

 

व्ही. एस. भुल्ले 

विलेज टाइम्स समाचार सेवा 


भैया- अब मने कै बोल्यू , की छाती कूटते भी म्हारे को शान्ति नसीब नही न ही म्हारे को मुक्ति मिलने बाली मने तो आज सबाल करना चाहु अपने पूर्वजो से कि आखिर उन्होने क्या देख सुनकर म्हारे महान लोकतंत्र को अंगीकार स्वीकार किया जिसके गर्भ से पीढ़ाओ का अम्बार टूट पड़ा है पीढ़ा के जनाजे पर छाती कूटते म्हारे माईबाप मातम मे डूबे है मगर निदान का ओर छोर कहां है किसी को नही पता बंगाल के नंदी ग्राम मे मचे कोहराम की माने तो सिर्फ नन्दि ग्राम ही नही समुचे बंगाल मे बबाल कटा पढ़ा है व्हील चैयर पर दीदी का प्रचार और बंगाल मे सरकार बचाने की जुगाड़ भले ही लोगो को आम लगे मगर आने बाले समय मे आम व्यक्ति के जीवन पर सियासत  भारी पढ़े तो इसमे किसी को अतिसंयोक्ति नही होना चाहिए । 

भैयै - मने तो लागे अब तो तनै भी सियासी पण्डित हो लिया जो भबिष्य वाणी कर लोगो को वर गला सियासत का अर्थ समझा रहा है  कै थारे को मालूम कोणी सियासत बड़ी ही गूण विद्या होवे जिसको समझ पाना थारे जैसै काले पीले  चिन्दी पन्नै बालो की बस की बात नही कै थारे को मालूम कोणी ये वही दीदी है जिसने 35 बर्ष तक शासन करने बाले कम्युनिष्टो को सत्ता से बैदखल किया था और विगत 10 बर्षो से पश्चिम बंगाल की सत्ता मे काबिज है ।

भैया - मगर इन राष्ट्र्भक्तो का क्या करू जो समुचे भारत बर्ष मे भगवा फहराना चाहते है मगर भाया मने तो बोल्यू अगर भगवा फहरा या नही फहरा तो दो बाते होगी या तो दोनो मे से किसी एक की सरकार बन जायेगी या फिर दोनो मे से एक पार्टी सड़क पर आ जायेगी । बोल भैया कैसी रही ।

भैयै - मुये चुप कर गर किसी सी डी इ डी या आई बालो ने सुन लठ धारियो को बता दिया तो थारी तो थारी म्हारी भी दिग्दर्शन पर सुन्दर फोटो लगी माला नजर आयेगी फिर थारी देश भक्ति हाथो हाथो मसल बीच चैराहे पर लाबारिस पढ़ी नजर आयेगी इसलिये मने तो बोल्यू तने तो चुप ही कर इसी मे थारी और म्हारी भलाई है ।

भैया - तने ठीक बोल्या जिसकी लाठी उसकी भैस सो कहते है लठ के आगे तो भूत भी भागते है सो म्हारे जैसै हाड़मास की क्या औकात मने समझ लिया थारा इसारा अब मने भी नगरीय पंचायत मे बनने बाली सरकारो मे ही अपनी जुगाड़ फसाउगा पार्षद न सही तो कम से कम सरपंच तो बन ही जाउगा सल्तनत न सही जागीर दार तो लोकतंत्र मे कहलाउगा चैसर भले इतिहास हो चुकी हो मगर मने भी शतरंज के 64 घर बाली सियासत जमा आने बाले समय मे गाॅब गली ही नही नगर महानगर प्रदेश देश मे अपनी सियासत का लोहा मनबाउगा चल गया जादू चूक गये मौत कम्पनी का प्रचार है बोल भैया कैसी रही । जय स्वराज ।    

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