मायावी कला सिद्धस्त होने की होड़ मे मलाईदार महकमे
दूरभाष है तो सेवा मे नही, मोबाइल है तो उठेगा नही
माईबापो से हलाकान राजा, प्रजा
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
जिस तरह की संस्कृति म.प्र. के मलाईदार महकमो मे पनप चुकी वह इस लोकतंत्र मे किसी के भी हित मे नही जनधन पर बने इन महकमो के घरोधे यू तो शहर से कोसो दूर हे अगर ऐसे मे माईबाप आॅफिस नही बैठै तो समझो आशा अकांक्षाओ का कचूमर बनना तय है खासकर म.प्र. के ग्वालियर संभाग की बात करे तो परिवहन महकमे ने आलीशान भवन जनधन पर सेवा के लिये हासिल किये है उनके हाॅलात कुछ ऐसे ही है करोड़ो के खर्च पर निर्मित यह भवन भले ही शहर के बाहर हो मगर आॅफिस मे कौन कब मिलेगा यह सुनिश्चित नही बैचारे लोग पहले तो दलाली से हैरान परेशान थे अब फिर से उनको उन्ही का सहारा लेना पढ़े तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी शासन सरकार मे बैठै ऐसे कारनामो पर भी गौर करना चाहिए जिससे सेवा का लाभ लोगो को सहज मिल सके और मायावी स्टाल मे मौज करने बालो को सबक काम कठिन है चैक पोस्टो पर टोकन रोकने की तरह मगर असंभव नही काश सेवको और शासको सदबुध्धि आये तो जन तंत्र के लिये बैहतर और उसमे आस्था रखने बालो के लिये राहत की बात होगी ।

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