सत्य की जीत पर, सत्य से सामना ............? तीरंदाज
व्ही. एस. भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा
भैया - फिर होलिका दहन और हमारे सांस्कृतिक सरोकार मगर आत्मसात क्या ? उस पर से कहर ढाता कोरोना आखिर क्या सम्पूर्ण सत्य यही है जिस आज भी मानव समझना नही चाहता है आखिर क्यो ? ऐसे अनगिनत सबाल जीवन मे अनादिकाल से रहै मगर म्हारे मगज मे ये बात क्यो न आवे कि जिन्दा दिली ही नैसर्गिक कर्तव्यो के निष्ठा पूर्ण निर्वहन के साथ सार्थक जीवन का नाम है इतिहास मे जो दफन है हमारी संस्कृति, संस्कार , सभ्यता , जीवन के अर्थ , मूल्य सभी हमारे श्रेष्ठतम मार्ग दर्शक रहै है । कई उदाहरण ग्रन्थो से लेकर इतिहास मे आज भी मौजूद जिनके आभास समय निकल जान के बाद होता जीवन को हो पाता है तब जीवन के पास पश्चाताप के आलावा बहुत कुछ शेष नही रह जाता और यही जीवन की सबसे बड़ी असफलता होती है । निश्चित ही जब अपना कोई दर्द कष्ट मे होता है तो तखलीफ तो होती है मगर जब वह जीवन स्वयं ही अतिविश्वास के चलते बगैर किसी अपराध के दण्डित होता है और कष्ट का भागीदार तब की स्थति मे उसके सहभागी न तो उसकी भगनी न ही वह सज्जन सहपाटी सलाहकार स्वार्थी सहयोगी सभा परिषदे होती है जो उसके लिये सीधे तौर पर उत्तरदायी होते है मगर सहभागी नही नही उनकी प्रतिष्ठा ऐसी होती है जो उनके प्रारव्ध का बखान कर सके । इसलिये होली उत्सव के मायने समझ अनुसार जीवन मे जो भी हो सकते मगर सत्य एक है और वही आदि अनादि है जो जीवन का अहम भाग ही नही खुशहाॅल समृद्ध जीवन अंश भी है बोल भाया अब भी थारे को म्हारे मगज पर कोई सक ।
भैयै - मुये सक हो थारे दुश्मनो को, जो दिन रात थारी आस्तीनो की शोभा बढ़ाते नही थकते मगर मने तो थारे जैसै जीवनो का भला चाहु जिससे प्रकृति और जीवन की समृद्धि बरकरार रह सके और जीवन जो भी हो उसका अस्तित्व और खुशहाॅली बनी रह सके मने बस सिर्फ इतना कहना चाहु कि मानव कर्म मानव धर्म की ध्वजा पताखा हमेशा जीवन मे लहराती रहै जो हमारे उत्सवो की उपायदेयता से स्पष्ट है ।
भैया - मगर इस बार म्हारा मन न बोल्या कि किसी की बधाई लू या दू क्योकि म्हारा मानव मन बहुत व्यथित दुखी है एक तो कोरोना का कहर उस पर लापरबाह इन्सानी जीवन उस म्हारा गौवंश आखिर किस किस की कहुॅ अन्त नजर नही आता मगर म्हारा सबसे श्रेष्ठ सक्षम सारथी मित्र है म्हारा कर्म जो हमे समय वे समय ढाढय बधाता नही थकता । मगर कै करू अगर जीवन का यही अन्तिम सत्य है तो स्वीकारने मे हर्ज ही क्या ? जय श्री राम जय सियाराम ।
भैयै - भाया बिल्कुल ठीक जा रहा है अगर थारी यही रफतार रही तो निश्चित ही थारा जीवन कुछ न कुछ अवश्य हासिल कर जायेगा वरना जो आया है इस दुनिया मे वह अवश्य आज नही तो कल प्रभु के ही यहां जायेगा तब थारे पास बहुत कुछ होगा मगर तब थारे को न तो दर्द न ही मानव जीवन पर कोई मलाल होगा ।
भैया - मने समझ लिया थारा इसारा बैसै तो म्हारी इच्छा थी कि मने इस उत्सव पर्व त्योहार पर रणनीत जीत हार पर बात करू मगर कै करू काड़ू नही माना और उसी ने हाथो हाथ अध्यात्म का खेल जमा डाला शायद जीवन का यह पहला और आखिरी मौका होगा जो मने काड़ू की सलाह पर विश्वास कर गया बैसै इस दुनिया मे विष विश्वास के सौदागरो की कमी कहां है सो भैया मने तो बोल्यू आज नही तो कल सत्य की बैला अवश्य आयेगी और जीवन को जीवन के सत्य से अवश्य अवगत कराने मे अवश्य सफल हो पायेगी । जय स्वराज ।

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