कबिलाई तंत्र में तब्दील होता , जनतंत्र


गैंग गिरोहबन्दी की जकड़ में जीवन मूल्य और सरोकार 

व्ही. एस. भुल्ले 


विलेज टाइम्स समाचार सेवा 

विधि की बैधानिकता और मौजूद विधान पर सबाल निश्चित तौर पर बैमानी ही कही जायेगी क्योकि विधि की बैधानिकता और विधान आज भी उतने ही पवित्र है जैसै हमारे स्थापित विधान है जिनमें अगाध आस्था अनादि काल से मानव की पहचान रही है और उसके जीवन मूल्य उसकी धरोहर जो समृद्ध खुशहाॅल जीवन का मार्ग आज तक प्रस्थ करते आ रहै है । मगन जब आज मानव जीवन राजतंत्र को त्याग जनतंत्र के रथ पर सबार श्रेष्ठ मानव जीवन के लिये , श्रेष्ठ जीवन मूल्यो की ध्वजा लिये चक्रबृति सम्राट बनने की दिशा मे बढ़ चला है ऐसे में कबिलाई तंत्र की खुली दस्तक जनतंत्र पर सबाल खड़े करने काॅफी है । क्योकि जिस तरह से सेवा कल्याण विकास व्यापार के क्षैत्र मे गैंग , गिरोह बन्दी फलफूल रही है और जिस तरह से जीवन मूल्य जीवन सरोकार गाॅब गली मे कलफ रहै है उनकी अनदेखी उतना ही बड़ा जघन्य अपराध है जिसे न तो मानव जीवन मूल्य न ही जीवन के सरोकार न ही विधि विधान आज तक कभी अंगीकार किया फिर समय बैसमय कीमत जो भी रही हो । सारे जहान को मुटठी मे कर लेने के जुनन की जंग जीवन मे कोई नई बात नही मगर जनतंत्र के चैराहै पर जिस तरह गैंग गिरोहबन्दी की तस्वीरे नजर आती है वह बड़ी ही डरावनी है ऐसे मे कैसै बचेगे जीवन मूल्य और जीवन सरोकार और कैसै होगा सर्बकल्याण स्वयं अपने आप में एक बड़ा सबाल है । मगर लगता नही की इतनी जल्द बहुत कुछ ऐसा होने बाला है जिस पर मानव जीवन स्वयं पर गर्व कर गौरान्बित मेहसूस कर सके क्योकि बच्चो को पता नही , युवा सिर्फ रोजगार चाहता और बुजुर्ग मौजूद पीढ़ी की खुशी चाहता ऐसे जीवन मूल्य जीवन सरोकारो की बात कौन करे क्योकि कबिलाई , गैंग गिरोह बन्द संस्कृति न तो यह अब मुनासिब रही न ही इसका कोई मूल्य सब को अपना अपना कल्याण फिलहाॅल सर्बोच्य नजर आता है आज की समझदार पीढ़ी और जीवन मूल्य सरोकारो मे आस्था रखने बालो को समझने बाली बात होना चाहिए क्योकि बगैर पुरूषार्थ मानव जीवन की उपायदेयता का कोई अर्थ नही काश इस सच को हम जितनी जल्दी समझ पाये उतना ही यह मानव जीवन और मूल्यो के हित मे होगा । जय स्वराज । 


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