आस्था को अघात और विश्वास से बैरूखी विनास के संकेत


स्थापित संस्था, संस्कारो का संरक्षण सर्बकल्याण में अहम

व्ही.एस. भुल्ले 


विलेज टाइम्स समाचार सेवा 

माननीय, श्रीमानो, माईबाप आपकी निष्ठा कर्तव्यनिर्वहन पर हमे कतई संदेह नही क्योकि आप हमारे अपने है क्योकि प्राप्त जबाबदेही के निर्वहन पश्चात हमे और आपको एक साथ ही खुशहाॅल जीवन जीना है मगर आज आपके और हमारे पास उर्जा और समय है कि हम अपना व अपनो का भबिष्य बैहतर बनाने मे अपना अपना योगदान पूरी निष्ठा ईमानदारी के साथ दे मगर क्या करे आघात से आहत आस्था और विश्वास से विमुख होती हमारी कृतज्ञता हमे कलंकित करने पर अमादा है जो हमारी स्थापित संस्था और संस्कारो को लहुलुहान करने काॅफी है । छिनते रोजगार उधार के माल पर धंधा कर परिवार पालने बाले लोग घर का सब कुछ धंधे मे लगा भुगतान के नाम पाई पाई को मोहताज है क्योकि कंगाल खजाने की आढ़ मे राजधानी मे जो अघोषित धंधा चल निकला है उसने आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है मगर सुनने समझने बाला कोई नही बर्षो से घर की पूॅजी लगा भुगतान के इन्तजार बैठै लोगो आज भी विश्वास है कि उनकी मेहनत का आज नही तो कल अवश्य भुगतान होगा मगर बर्तमान हालात इस बात के गबाह बनते जा रहै है कि उनका यह विश्वास सत्ताओ की बैरूखी के चलते टूटना तय है क्योकि मदमस्त सत्ताा यह किसी भी कीमत पर समझने तैयार ही नही की कही कुछ तो गलत हो रहा हे अगर कुछ दिन और ऐसा ही चलता रहा तो निश्चित ही सर्बकल्याण कोसो दूर और स्वकल्याण संस्थाओ मे बैठै लोगो पर भारी हो जायेगा जो न तो संस्थाओ के हित मे है न ही माननीय, श्रीमानो, माईबाप आपके हमारे हित मे क्योकि सभी को एक साथ रहना है क्योकि आपकी हमारी गली गाॅब नगर शहर प्रदेश देश एक ही रहने बाला है जिन्है विदेशी भूभाग पर बसने का मुगालता है तो वह समझ ले घर घर होता है पराई जमी और घर कभी अपना नही होता काश इस सच को हम सभी समझ पायें तो आज के समय मे यही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी काश ऐसा हो पाये । जय स्वराज । 


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