जुनूनो की जंगो से आहत जीवन , जीवन मूल्य हुये लहुलुहान
व्ही. एस. भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा
जंग प्रकृति मे जिन्दा रहने की रही हो या फिर जीवन को सार्थक सफल सक्षम खुशहाॅल बनाने की रही हो जब तक उसका भाव सर्बकल्याण रहा उन जंगो के परिणाम सार्थक सफल रहै मगर जब जब भाव उसके विपरीत रहै वह जंग निर्रथक बोझ और जीवन को संकट मे डालने बाली रही । फिर सत्ता सरकारे जो भी रही हो आज एक मर्तवा फिर से जीवन सर्बकल्याण की अगुआयी करने संघर्षरत है ऐसे मे निष्ठा की सार्थकता पर चर्चा स्वभाविक हो जाती है मगर लगता है मानव जीवन मे अब यह सबाल सबाल न हो स्वयं सबाल बन गये है तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी । ऐसे मे हर मानव का कर्म धर्म होना चाहिए की वह स्वयं व अन्य जीवनो की जीवन मे उपायदेयता सिद्ध करन जीवन से सार्थक संघर्ष करे और मानव धर्म के मार्ग को प्रस्त करते हुये स्वयं के जीवन की सिद्धता सिद्ध करे आज यही सबसे बड़ी समझने बाली बात हर मानव के लिये होनी चाहिए । जय स्वराज ।

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