तो सिंधिया अभी तक मुख्यमंत्री बन गये होते राहुल गांधी
जितनी चिंता राहुल जी को आज है काश इतनी चिंता तब की होती जब में काॅग्रेस मे था सिंधिया
क्या बैकार गया बर्षो का कड़ा संघर्ष ?
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
म.प्र. में 15 बर्षो तक जन सेवा कल्याण की खातिर कड़ा संघर्ष करने बाले सिंधिया ने कभी रैली प्रदर्शन पैदल मार्च सत्याग्रह सब कुछ तो किया मगर एन वक्त पर 10 बर्ष का सियासी अज्ञातबास काटने बाली सियासत और मात्र 1 बर्ष मे ही सरकार की कमान सम्हालने बाली सत्ता इतनी बैलगाम हो जायेगी शायद ही 15 बर्ष तक सत्ता के खिलाफ संघर्ष करने बाले उस नौजवान नेता ने सपने मे भी सोचा होगा जिस तरह से तथाकथित सत्ता सियासत ने सिंधिया को दरकिनार किया परिणाम कि तत्कालीन सत्ता सियासत को हवा देने बाले अब सड़क पर है अब ऐसे मे राहुल की राय का क्या मतलब शेष रह जाता है यह तो राहुल जाने मगर जो दर्द सिंधिया के जबाब मे छिपा वह अवश्य कई सबाल खड़े करता है फिलहाॅल तो अब सिंधिया राहुल की राह सियासी तौर पर जुदा है मगर सबालो मे दोनो के बीच सम्मान का सिलसिला आज भी बरकरार है ।

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