जांच ऐजेन्सियो पर बढ़ते सबाल, जनतंत्र मे घातक
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
फिलहाॅल जिस तरह से विधि विरूद्ध वित्त पोषित योजनाओ और अबैध शुल्क बसूली के खिलाफ जांच ऐजेन्सियो का कांरबा चल रहा है उसका सच तो विधि सम्बत आस्था रखने बाले ही जाने या फिर सेवा पारदर्शी परिणाम मूलक सिद्ध हो उसको बनाने क्रियान्वित करने बाले ही जाने मगर जिस तरह की धरपकड़ या शिकायत के आधार पर जबाब तलब करने की संस्कृति चल निकली है उसने जांच ऐजेन्सियो को ही कठघरे मे खड़ा कर दिया है शिकायत कर्ताओ से परेशान लोगो का कहना है कि जांच ऐजेन्सियां शिकायत को सही मान हमारे प्रमाणिक तथ्य दरकिनार कर जो प्रारम्भिक तौर पर हमारे निर्दोष होने के सबूत हो सकते है बजाय के न्यायप्रिय जांच होने के जांच तो प्रभावित होती ही है बल्कि झूठी शिकायतो से मानसिक प्रताड़ना भी होती है जो सुखद नही कही जा सकती न ही जनतंत्र के हित मे बैहतर हो शासन एक ऐसी ब्यबस्था कायम करे जिससे दोषी बचने न पाये और निर्दोष लोग ऐसी शिकायतो और जांचो के बैबजह शिकार न हो पाये क्योकि जिस तरह से लोग सफर कर रहै है तथ्य देखने से स्पष्ट होता है कि कही तो कुछ गलत हो रहा है ।

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