विधि के राज मे , चिताओं के सामने , कमी गिनाने की खूबी 24 घन्टे में संक्रमितो का आकड़ा 3 लाख 32 हजार के पार
गंभीर हालातो के बीच गिड़गिड़ाते लोग
व्ही. एस. भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा
भारत मे कोरोना की दूसरी लहर के बीच भले ही संक्रमितो का आकड़ा अब 24 घन्टे के अन्दर 3 लाख 32 हजार के पार जा पहॅुचा हो मगर विधि के राज में चिताओ के सामने एक दूसरे की आज की सियासत में कमी गिनाने की गजब की खूबी है टी बी चैनलो पर चीखते चिल्लाते सियासी लोग एक दूसरी की कमी गिनाने के आगे यह मानने ही तैयार नही लोग 21वी सदी मे किस हालत मे दम तोड़ रहे है बैबस लोगो की उठती चिताओ की लो भले ही चीख चीख कर बिगड़े हालातो को व्या कर रही हो और बिलखते लोगो की चीथ पुकार भले ही सुनाई न दे रही हो मगर इतना तो तय है कि अगर हालात और बिगड़े तो बचने बाला कोई नही । आज की स्थति मे सेवा कल्याण मे डूबी सियासत को यह समझने बाली बात होना चाहिए । मगर लगता नही कि सियासत इन हालातो मे भी कोई बड़ी सीख लेने बाली है ।
अब सबाल वही फिर सौ टके का है कि आखिर क्यो हमारी सत्ताये सियासत सच को स्वीकारने मे समय रहते अक्षम असफल रहती है कारण साफ है सर्बकल्याण के लक्ष्य के साथ सेवा कल्याण मे डूबी सत्ताये अब सेवा भावी होने बजाय सुविधा भोगी हो गयी है । संवेदनशील होने के बजाये सिस्टम मे पूर्ण आस्था रख गैंग गिरोह बन्द संस्कृति मे डूब चुकी है हर समझ रखने बाले को अफसोस तो तब होता है जब वह यह पढ़ते देखते सुनते है कि जिस जबाबदेह को पत्र लिखा गया महिनो जबाब ही नही मिला जिस ईमेल पर मेल किया गया उसका इनबाॅक्स फुल है फोन लगाने पर जबाब मिलता है आपको बता दिया जायेगा अब ऐसे मे कौन सत्ता प्रमुख है किसकी सत्ता है कौन इस सत्ता को संचालित कर रहा है यह समझने बाली बात है क्या सत्ताओ का स्वभाव ऐसा ही होता है क्या वह वाक्य मे ही अंधी बैहरी होती है । अगर चर्चाओ कि माने तो व्यवस्था मे अब ऐसे लोग भी पैठ जमा चुके जो सिर्फ और सिर्फ माई बापो के फोन के अलावा आमजन के फोन तक उठाने मे तौहीन समझते है । अब ऐसे मे कैसी सेवा कैसा कल्याण लोगो की समझ से परे है उदाहरण बतौर केन्द्र सरकार , कोर्ट के स्पस्ट निर्देशो के बाबजूद आॅक्सीजन सप्लाई बाधित हो रही है चैनलो पर सेवा के नाम सियासी जंग छिड़ी है । उधर कोरोना की बैरहम मार आम लोगो को अपने आगोस मे ले रही है ऐसे मे बैहतर तो यह होगा की अगर कोरोना से जान छुड़ानी है तो तत्काल वैक्सीन लगाबा ली जाय और सावधानी बतौर कुछ दिन घरो के अन्दर ही रहा जाये बहुत जरूरी होने पर ही मुॅह पर मास्क लगा निकला जाये साथ ही किसी भी व्यक्ति से दूरी का ध्यान अवश्य रखा जाय और बार बार हाथो को साबुन से साफ किया जाये क्योकि जो हालात है हमारे सामने है और इसी से हमे दो चार होना है और स्वयं के साथ अपनो की भी जान की रक्षा हमे ही करना है क्योकि अब स्थति बिकट है और कोरोना का संकट निकट है सो समझदारी इसी मे है कि अब हम सजग रह अपने दायित्वो का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करे तभी हम स्वय और अपने अपनो की जान बचा पायेगे । जय स्वराज ।

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