समृद्धि , सहभागिता से , सत्य , श्रेष्ठजनो का तिरस्कार तथा संकट के समय मचा हाहाकार ..................तीरंदाज ?
व्ही. एस. भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा
भैया - कहते है कि समृद्धि , सर्बकल्याण की सहभागिता में तिरस्कार और संकट के समय सत्कार करने की शासन सत्ताओ में गजब की चाहत रही है मगर अब जब दौरे संकट से महासंकट तक जा पहॅुचा है ऐसे मे जिन्दा रहने मची चीथ पुकार तड़फ तड़फ कर मरते लोग बिलाप करते स्वजन परिजन अन्तिम क्रिया का इन्तजार करती अर्थि जनाजे किनके है मानव होने के नाते हमारे अपने ही है । मगर दर्द क्यो हमारे बीच से नदारद है आखिर क्या हुआ इस जीवन मे जो जिन्दा रहते जान लुटाने तैयार थे और जब आज वही शैया पर है और सहजन परिजन नजदीक है मगर वह भी हालातो के मददेनजर बदबहास है कई रूधन ऐसी भी है जो रूकने का नाम नही ले रही तो कुछ तो अपने प्रियजन सहजन सहोदरो सज्जनो का ठीक से मातम मना जनाजा तक नही उठा पाये आखिर भैया यह हो क्या रहा है ।
भैयै - मुये बाबले कै थारे को मालूम कोणी किलर कोरोना का कहर चल रहा है और म्हारे महान भूभाग पर किलर कोरोना के खिलाफ जंग का आगाज हो चुका जिसमे शाही सैना से लेकर हाथी उट पैदल सैनिको का कूच मुॅह पर मास्क हाथ मे साबुन सेनेटाइजर ले कोरोना से दो दो गज की दूरी से दो दो हाथ करने मैदाने जंग पहुुॅच रहे है कोरोना को सिकस्त देने टीकाकरण के माध्यम से लोगो को जीवन कवच मिल रहे है । आॅक्सीजन गैस , और औषधी सहित संसाधन के इन्तजाम चल रहै है ।
भैया - मगर पहली कुर्बानी किसकी होगी , कोरोना या कोरोना किलर की काड़यू बोल्या कि कोइ्र्र न बचने आड़ा कै काड़ू की काली बाणी सच हो जायेगी और म्हारी सारी तैयारी धरी की धरी रह जायेगी ।
भैयै - अरे बाबले कोरोना से निबटने बैक्सीन आ चुकी है और म्हारी कौम मय अण्डी बच्चो के जाग चुकी है । बस म्हारे को तो इन्तजार म्हारे सैनापतियो का है कि वह मुकुट , कुण्डल , कवच पहन जल्दी से मैदान मे आ जाये और मुये कोरोना को ऐसी धूल चटाये कि वह फिर से म्हारी को छूना तो दूर आॅख भरके भी न देख पाये और म्हारी रेला रैलियो मे न घुसने पाये इतने पर तो चल जायेगी अगर वह इन रैला रैलियो मे घुसने मे कामयाव रहा तो कब किसकी उठेगी कब किसकी जलेगी भाया मने भी नही बता पाउगा ।
भैया - मने जानू मगर कै करू असहाय निसहाय जीवन बिलबिला रहै है मिटटी पढ़े इस कोरोना पर जो सगे संबधी भी अन्तिम क्रिया मे ठीक से शामिल नही हो पा रहै है । किसी को वेन्टीलेटर तो किसी को आॅक्सीजन तो किसी को इन्जेक्शन नही मिल पा रहे है हालात ये है कि स्वयं सेवा कल्याण मे डूबे लोग मदद को चिल्ला रहै है । अब ऐसे मे भाया सबाल तो बनता है मगर ये अवूझ सबाल आखिर किस पर फैकू लाॅकडाउन तो कही कोरोना कर्फयू है चहुॅ ओर कोरोना का कहर चल रहा है । सच बोल्यू तो अपने आगे कोई किसी की नही सुन रहा है सो अपने सबालो के कचरे की आग से धुआ उठा मच्छर भगा रहा हुॅ ओर घर के अन्दर ही मगज मारी कर कोरोना भगा रहा हुॅ निश्चित ही ये घड़ी संकट की है सो कंटको से जितना दूर हो सके दूर ही रहो इतने पर तो बच जायेगी वरना थोक बन्द संक्रमितो की लिस्ट हर रोज बढ़ती ही जायेगी । बीते बर्ष से कोरोना महान पर लिख रहा हुॅ फिर भी आय दिन कोरोना का शौर शराबा सुन रहा हुॅ मगर म्हारी मेहनत और म्हारे हाड़तोड़ अमूल्य योगदान मे मानव होने के नाते कोई कमी हो बता बैहतर हो तने भी बोलना बन्द कर मुॅह पर मास्क लगा बार बार हाथ साफ कर हो सके तो घर के अन्दर ही शेष समय बिता और बारी आने पर हाथो हाथ कोरोना वैक्सीन लगवा इतने पर तो थारी भी चल जायेगी , वरना थारी भी सुन्दर फोटो मय माला के टग सारी हैकड़ी दो ही झटके मे निकल जायेगी । कै थारे को मालूम कोणी अब तो श्राद्ध श्रद्धान्जलि के भी लाले है अन्तिम वक्त अपनो के चेहरे भी नही देखने मिलने बाले है । क्योकि अब तो विज्ञान भी भबिष्य बाणियो को धुल चटा न जाने क्या क्या बोल रहा है और म्हारे टी. वी. बालो की टीबियो मे हर रोज कोरोना खूब फलफूल रहा है ।

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