रत्नो से पटा लोकतंत्र ......................? तीरंदाज


फोई से रस निकालने की कला अर्थात इंसेटेटियूट आॅफ मनी प्रोडक्सन । 

व्ही. एस. भुल्ले 

विलेज टाइम्स समाचार सेवा 


भैया - टूटती अर्थव्यवस्था मे तू ये क्या बुद बुदा रहा है कै थारे को देश भर मे पसरता कोरोना महान नही दिख रहा है जिसने समुचे विश्व मे कोहराम मचा रखा है और म्हारे महान सज्जन पुरूषो को परेशान कर रखा है मने तो बोल्यू कि बात कुछ और आगे बढ़ती जा रही है अब न तो आॅक्सीजन न ही दवा काम आ रही है रही वैक्सीन तो उसका तो अभी अभियान ही शुरू हुआ है फिलहाॅल तो पूरे का पूरा कुनवा वैक्सीनेशन के इन्तजार मे बैठा है काड़ू बोल्या कि अब कोरोना की पकड़ सिर्फ बूढ़े पुरानो तक नही रही अब तो वह बच्चे युवा नौजवान सभी को असावधानी के अभाव मे अनजाने मे ही सही सभी को वितरित हो रहा है और तू है कि इन्सटेटियूसन आॅफ मनी प्रोडक्सन बनाने मे जूझ रहा है सारा देश कोरोना से जान छुड़ाने मे लगा है और तू है जो फोई से रस निकालने के फाॅरमूले बना रहा है । यह कला तो राजतंत्र मे सिर्फ वीरवल महान के पास थी अब लोकतंत्र मे कौन वीरवल महान आ गया है । जो तू उसके यसोगान गा मने समझा रहा है । 

भैयै - मने जाड़ू वीरवल महान अकबर के समय हुआ था और उसने भी उस समय फोई से रस निकालने का उदाहरण कई मर्तवा अपने बुद्धिकौशल से प्रस्तुत किया था इसीलिये अकबर के दरबार मे उसे नवरत्न के रूप मे जाना जाता था और सर्बकल्याण न्याय मे उसके अक्लमंदी का लोहा माना जाता था ।

भैया - मगर म्हारा लोकतं़त्र तो बैसै भी वीरवल महानो से पटा पढ़ा है जगह जगह इस अर्थयुग मे फोई से रस निकालने की विद्या पसरी पढ़ी 70 फीसद सस्ते राशन की जमात धीरे धीरे राशन , आयुष्मान कार्ड , आवास शौचालयो से लैश हो रही है जिसमे फ्री का सलेंडर , सस्ती लाइट और आय दुगनी करने सीधे खाते मे नगद राशि पहुॅच रही है इतना ही नही जगह जगह फोकट मे वैक्सीन तो माई बापो की फौज कोरोना से लड़ हमारे जीवन कैसै बचे दिन रात एक कर रही है आॅक्सीजन पूर्ति के लिये आॅक्सिजन एक्सप्रेस रेल तो रेमडेसिविर के लिये जहाज चैपरो से ढुलाई हो रही है मगर कै करे म्हारे अपनो पर तो आजादी का ऐसा नशा चढ़ा है कि वह कोरोना किलर के प्राण घातक हमलो के बाबजूद उतरने का नाम ही नही ले रहा भाई लोगो है खूब शादियो मे जुटे है तो कोई सत्ता की जंग जीतने रैलियो मे खूब भीड़ इकटठी कर भाषण पैल रहै तो वही लोकतंत्र के राजा जनता बगैर मास्क के घूम अपनी लोकतंत्र मे एहमियत सिद्ध कर रहै है अब बैचारे माईबाप करे भी तो क्या ? जब राजा ही कानून उलंघन और व्यवस्था की बखिया उधेड़ने पर तुले हो तो हमारी संस्कारिक , बौद्धिक समृद्धि का अंदाजा लगाया जा सकता है । इस समृद्ध संपदा को देख ही , म्हारे मन मे यह ख्याल आया कि क्यो न ऐसे एटमोसपियर के बीच फोई यूनिवर्सिटी बना डालू और हाथो हाथ इन्सटेटियूट आॅफ मनी प्रोडक्शन की फैकल्टी खोल डालू सुना है शिक्षा स्वास्थ की दुनिया भर मे बढ़ी मांग है जिसमे सेवाकल्याण के क्षैत्र मे तो जबरदस्त डिमांड है । 

भैयै - अरे वावले कै थारे को मालूम कोणी वैक्सीनेशन का दौर चल रहा है संक्रमितो के आकड़े और अब मरने बालो को लेकर कोहराम चल रहा है मने तो बोल्यू गर कोरोना से बचना हे तो हाथो हाथ वैक्सीनेशन करा ले । यूनिवर्सिटी तो बाद मे भी खुल जायेगी गर पकड़ लिया कारोना ने तो थारी काली पीली चिन्दी बैसमय ही अनाथ हो जायेगी । जिस तंत्र मे जब पहले ही से मनी प्रोडक्सन मे पारंगत उस्ताद लोगो बेरोजगार हो रहे ऐसे मे थारी शिक्षा कौन लेगा काहै को गैंग गिरोहबंदी छोड़ थारे फाॅरमूले मे उलझेगा । बैसै भी म्हारे महान तंत्र मे मांॅग पूर्ति का फाॅरमूला सरचढ़कर बोल रहा है सेवा खादय जरूरत की बस्तुओ का बाजार सारे सेंसेक्स तोड़ रहा है । इसमे क्या आम क्या खास सभी का कचूमर हो रहा है औैैैैैैैैैैैैैैैैैर मनी प्लान्टो का काम दिन रात चल रहा है । 

भैया - मने जाड़ू आज कि व्यवस्था मे हर येक सिकंदर बनना चाहता है कोई सत्ता तो कोई कुबेर पति बनना चाहता हे मगर न तो कोई राम न ही कृष्ण और नही बुद्ध गाॅधी बनना चाहता है भाई लोगो की माने तो मालाई खोरो का कुनबा अब दस्यु डकैतो से दो कदम आगे माफिया बनना चाहता है जिसमे भूतो न भबिष्यते का इकबाल बुलंद बना रहे । मगर म्हारी पीढ़ा तो म्हारे गौवशं को लेकर है कि आखिर उन्हे कब उनका घरबार और उनकी मिलकियत गौचर सहित स्वच्छद जंगलो मे घूमने का अधिकार कब मिलेगा । जब तक म्हारा महान गौबंश इस भूभाग पर अधिकार बिहीन हो बैसहारा घूमेगा तब तक कोई कुछ भी कर ले किसी भी जीवन को चैन नही मिलेगा । तू और थारी सत्ताये जो भी चाहे कर ले मगर सुकून मिलने बाला नही क्योकि जिस भूभाग पर प्रभु कृष्ण ने स्वयं गौवंश की सेवा की हो उसी भूभाग पर उसे अनाथ बना दिया गया है । जो पाप ही नही महापाप है जिसकी भरपायी तो किसी भी रूप मे मानव जाति और सत्ताओ को करनी ही होगी । जय स्वराज । 


 

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