बगैर फ्रेमबर्क , दरकते जीवन सरोकार , सत्ता पर बड़ा सबाल
नेकदिल सियासी इन्सान की नेकनीयती भी न बन सकी समृद्ध , कंटक मुक्त जीवन की ढाल
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
सत्ता के अहंकार मे जबानी जमा खर्च पर समाधान का सिलसिला कहां जा रूकेगा थमेगा भले ही आज सुनिश्चित न हो मगर जिस तरह से बगैर फ्रेम बर्क के , प्रमाणिकता के अभाव मे जीवन सरोकार दरक दम तोड़ने पर बैबस मजबूर नजर आते है ऐसे मे सत्ता की निष्ठा पर सबाल उठना लाजमी है मगर अफसोस की यह सब कुछ उस नेकदिल इन्सान के राज मे हो रहा है जिसकी नेकनीयती भी अब कंटक मुक्त , समृद्ध जीवन की ढाल बनने मे स्वयं को अक्षम सिद्ध पा रही है । हर समस्या जीवन की जरूरत का समाधान जब जबानी जमा खर्च मे होने लगे और कोई भी सार्वजनिक सलाह मशविरे पर बगैर पूर्व तैयारी के सुप्रीम समाधान निकाल लोगो के आगे परोसा जाने लगे तथा समाधान के अभाव मे किसी सबाल का उत्तर देने के बजाय खबरो मे खबर के माध्यम से काउंटर किया जाने लगे ऐसे जीवन के सरोकारो का कलफना बिलखना बाजिब है ।
निश्चित रूप से म.प्र. के मुख्यमंत्री एक नेक दिल इन्सान है मगर वह एक परिपक्व सियासी इन्सान भी है वह व्यवहारिक जीवन मे जितने सरल सुझान है तो सियासी जीवन मे वह उतने ही बड़े समझदार है उनकी सलाह मत्रणा के साथ जमीनी स्तर तक गणित का ज्ञान रखने बाली सुपरसोनिक टीम भी है जो सियासी सरोकारो से लेकर सत्ता सरोकारो पर नजर रख समय जरूरत अनुसार निर्णय भी लेती है और जरूरत पढ़ने पर परिणाम भी देती है फिर परिणाम आंकड़ो मे हो या फिर जमीनी मगर फ्रेम बर्क के अभाव मे वह वो परिणाम नही दे सकी जिनकी आवश्यकता मानव जीवन मे सर्बोपरि होती है और उसके परिणाम जीवन सरोकारो को संरक्षण देने मे संक्षम सफल सिद्ध होते है जिन्है इतिहास याद भी रखता है और भबिष्य भी उन्है सराहता है । मगर चैथे कार्यकाल मे कोरोना के रूप मे जो चुनौती उनके सामने है वह किसी विराट संकट से कम नही जिसके समाधान खोजने निदान खोजने मे भले ही सुप्रीम टीम के पसीने न छूट रहै हो मगर चुनौती कुछ कम नही कारण साफ है व्यवहारिक फे्रम बर्क का अभाव और जरूरत से अधिक टीम पर निर्भरता साथ ही मौजूद सियासी माहौल मे खुद को बनाये रखना मगर यह भी सत्य है कि इस कार्यकाल को छोड़ दे जो सिर्फ और सिर्फ उधार का है जिसमे कोरोना कहर जिसे भी थामा जा सकता था मगर ऐसा हो न सका मगर कोसिस अभी भी जारी है जो सराहनीय ही की जायेगी मगर जब तक कोरोना से निजात म.प्र. के हर जीवन को नही मिल जाती तब बात अधूरी ही रहेगी मगर अभी भी वक्त है अगर सलाहकार जबानी जमा खर्च से निकल प्रमाणिक फ्रेम बर्क के सहारे समाधान ढूढ़ेेगे तो यह नेक नियती ही नही एक नेक दिल इन्सान के जीवन की बढ़ी उपलब्धि और मानवीय जीवन के रूप मे ऐतिहासिक कार्य इस कोरोना काल मे होगा जिससे लाखो जीवन संक्रमण और संकट से बच अपना समृद्ध खुशहाॅल जीवन जी सकेगे यह बात सिर्फ खबर नही एक प्रमाणिक बात सिद्ध हो सकती है मगर कोसिश तो कहते है करने बाले को ही करनी होती है ।

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