मीठा मीठा गपगप , कड़बा कड़बा थू ............. तीरंदाज ?
गजब ज्ञान से थर्राई बिद्धबतता
व्ही. एस. भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
भैया - मने तो कायल हो लिया म्हारे माईबापो का क्या गजब ज्ञान पाया है कि कबाडे पर खड़े हो पुरूषकार का ऐलान खुद ठोकने मे जुटे है और मातमपोशी के समय एक दूसरे की पीठ ठोक रहै । है न गजब का ज्ञान की मीठा मीठा गप गप और कड़बा कड़बा थू । पूरे दो महिने से छाती कूटती आबाम , आबाद हुये शमसान और संक्रमण के ढेर पर मरहम लगाने के बजाये मीनारो से बाग देने बाले अब मैदानो की ओर कूच कर चुके है तो सिपहसालार यह घोषणा करने पर तुले है कि सरदारो की मेहनत और कोर कमाण्डर के अदम्य साहस और रणनीत के चलते अब सुल्तान को भी म्हारी रणनीत भाई है और शाही सैना मे भी यह ऐलान हो कि म्हारे रणबाकुरो ने किस तरह मुये कोरोना को हाथो हाथ धूल चटाई है ।
भैयै - मुये चुप कर आखिर गर किसी ने सुन लिया तो हाथो हाथ कुल नही तो राष्ट्र्द्रोही साबित हो जायेगा विधि विद्धवानो की ऐसी लम्बी चैड़ी फौज तैनात है कि कौन सी कहां लगी गिनती भी नही गिन पायेगा । इसलिये संस्कार ला और या तने माई बापो की पलटन मे शामिल हो जा ऐसे मे इतने पर तो थारी चल जायेगी वरना मने तो बोल्यू पहली फुरसत मे ही थारी मिटटी बैभाव ही बीच बाजार कुट जायेगी ।
भैया - तो क्या सच बोलना कोई अपराध है सच तो यह है कि गर म्हारी 2 माह पहले ही मान ली होती तो आज स्वछच्द समृद्ध जीवन की यह दुरगति न हुई होती आज जिस फाॅरमूले को यह अपना बता अपनी अपनी पीठ थपथपा रहै है । यह फाॅरमूला तो दो माह पहले म्हारे स्वराज बालो ने ही दिया था मगर तब माई बापो को क्या पता था कि रायता कितना फैलने बाला है जब रायता फैल गया और समेटने मे अच्छे अच्छो के पसीने छूटने लगे तब महामनाओ को ध्यान आया कि मसला कोई छोटा नही कही ऐसा न हो कि खुद की पीठ थपथपाने का फाॅरमूला उन्ही पर उलटा न पढ़ जाये मने तो बोल्यू कि जिस दिन सत्य के लिये आग्रह हुआ था उस दिन भी बैचारे स्वराज बालो ने आग्रह किया था कि कोरोना कोई दो चार दिन की समस्या नही बल्कि यह समस्या लम्बी रहने बाली है इसलिये स्थाई समाधान के रूप मे तथा एक ऐसा माॅडल प्रदेश को देने के रूप मे हर वार्ड गली गाॅब मे शासकीय सेवक तथा जनप्रतिनिधि सम्भ्रांत लोगो की कमेटियाॅ बनाई जाये जिससे इस कोरोना को जड़ मूल से खत्म कर लोगो का जीवन संक्रमण से सुरक्षित किया जा सके मगर कहते है कि शासन सत्ताओ मे अनादिकाल से ही सत्य को न सुनने स्वीकारने की गजब की चाहत रही है । यह सच है और परिणाम सामने है जिसे नकारा नही जा सकता । आज जब हम न जाने कितने अपने अपनो को खो चुके है कई बच्चे अनाथ हो चुके है ऐसे मे अगर कुछ ठीक होने को संकेत मिला है तो वह सुखद ही कहा जायेगा म्हारी तो पूरी सहानुभूति बैसै भी हमेशा से माईबापो के साथ ही रही है भले वह हमे कुल द्रोही राष्ट्र्द्रोही समझे मगर हमारा आचरण व्यवहार कभी म्हारे माईबापो से जुदा नही रहा तो फिर म्हारे को काहै का डर ।
भैयै - डर तो जीवन मे होना चाहिए शासन सत्ता का डर काल कोरोना का डर और साथ ही माईबापो का डर क्योकि म्हारा प्रिय प्लेटो पहले ही कह गया कि भय न्याय का पुत्र होता है सो भाया गर वंश चलाना आगे बढ़ाना है तो डरना तो पढ़ेगा ही फिर भले ही तने अपने माईबापो से मत डर मगर किलर कोरोना से तो थारे को डरना ही पढ़ेगा और मुॅह पर मास्क लगा घर की चार दीवारी मे ही रहना पढेगा साथ ही हाथो हाथ वैक्सीन का पहला और दूसरा डोज भी लेना पढ़ेगा तभी थारी बच पायेगी नही तो थारी काठी भी लकड़ियो के अभाव मे चील कौये ही नही न जाने किस किस के काम आयेगी ।
भैया - मने समझ लिया थारा इसारा अब और आज के ही बाद से मने न तो कोई ज्ञान विज्ञान बताउगा न ही अब घर के बाहर जाउगा मिली वैक्सीन तो नम्बर आने पर पूरे साॅसल दूरी के साथ सेन्टरो पर पहुॅच वैक्सीन हाथो हाथ लगबाउगा साथ ही बार बार हाथ धो सेनेट्र्ाइज कर शेष जीवन बिताउगा कसम म्हारे को म्हारे काले पीले चिन्दी पन्ने की अब कभी माईबापो की कृतज्ञता पर कोई सबाल नही उठाउगा क्योकि किल कोरोना के बीच बैचारे दिन रात लगे है और अधिक से अधिक लोग कोरोना संक्रमण से कैसै बचे इस जुगाड़ मे लगे है अगर माई बापो की माने तो अब वह फाॅरमूला भी उनके हाथो जा लगा है जिस पर स्वयं सुप्रीम कमाण्डर ने भी संज्ञान लिया है मगर म्हारे को सिर्फ एक ही चिन्ता सताये जा रही है कि कोरोना का तो जो होगा सो होगा मगर ब्लेक फंगस की बात कहा से आयी है सुना है यह तो गर किसी को जाये तो कोरोना की भी ताई है मने तो लागे की अब म्हारा शेष जीवन म्हारे पर ही भारी पढ़ने बाला है म्हारे पास तो अब सिर्फ म्हारे प्रभु का ही कंटक संकटो से निबटने का बड़ा सहारा है । जय स्वराज ।

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