क्रायसेस के बीच मैनेजमेन्ट , अर्थात आपदा प्रबंधन .....तीरंदाज


गजब आयडिया के आगे सुल्तान की सोच भी चारो खाने चित 

व्ही. एस. भुल्ले 

विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 


भैया - मने तो आज धन्य हो लिया ऐसा गजब का आयडिया देख बैचारे गौरी महान की रूह भी आज कलफ रही होगी जिसने गायो के झुन्ड को आगे कर म्हारे महान शासक सम्राट प्रथ्वी राज चैहान को बन्दी बना अपनी ही मौत को आमंत्रण दे डाला मगर क्या करे सत्ता का स्वरूप ही ऐसा होता है । वरना एक त्रिलोकी न बन जाता । खैर क्रायसेस के बीच मैनेजमेन्ट की सोच जिसकी भी रही हो आयडिया तो गजब ही कहा जायेगा । क्योकि जमाना जो प्रबन्धन का है सत्ता शासन हो या फिर सामाजिक आर्थिक सियासी सरोकार आजकल हर क्षैत्र मे मुये प्रबंधन का ही सहारा है । कहते गौरी को भी न जाने कितनी बार महान पृथ्वी राज ने अपने बाहुबल से धूल चटाई और एक मर्तवा तो वह गायो के झुन्ड की आढ़ मे बचकर भाग निकला नही तो उसी दिन सुल्तान महान का क्रियाकर्म मैदाने जंग मे हो लिया होता मगर क्या करे भाग्य गददारो का धनी गौरी बच निकला । परिणाम की भारत बर्ष के वीर सपूत को सुल्तान को सुल्तान के सिंहासन पर ही निपटा अपनी बैस कीमती जान अपने श्रेष्ठ सलाहकार चद्रवरदायी के साथ गवांनी पढ़ी । अर्थात इस महान राष्ट्र् को उस समय बड़ा नुक्सान उठाना पढ़ा । लगता वही नुक्सान आज भी उठाना पढ़ रहा है अब लोग घरो मे भूख प्यास या बिजली की मनमानी से पीढऋा से मरे या फिर बाहर निकलते ही कोरोना का शिकार बने मरना तो अब दोनो ही स्थति मे है क्योकि क्रायसेस का प्रबंधन ही ऐसा है की हस्ताक्षर किसी ओर के हाथ और मोहर किसी ओर के पास तथा नाम जनता महान का वाह प्रबंधन महान मने तो पहले ही से भाई लोगो का कायल हुॅ मगर म्हारे मगज से एक बात अवश्य दूर है कि यह सारा रायता फैलाने बाला कौन है । काश कोई इस प्रकाश डाल प्रबंधन से बाहर ला पाये तो आज मारे लिये यह सबसे बड़ी उपलब्धि होगी । 

भैयै - मुये चुप कर जब संक्रमण सहित मौतो का आंकड़ा दिन व दिन गिर रहा है तो फिर तू क्यो मगजमारी कर रहा है कै थारे को म्हारे महान आयडिया पर भरोसा नही जो तने अर्र बर्र बक रिया है और फिर इससे तो म्हारे महान वीर निवट ही लेगे साथ ही उस काले सफेद फंगस को भी मटिया मेट प्रबंधन महान से कर देगे कै थारे को मालूम कोणी म्हारी सैना मे एक से बढ़कर एक शूरवीर घोषणा और कर्मवीर भरे पढ़े समस्या जो भी समाधान हो जायेगा समस्या भले ही बाद मे आये मगर ऐलान हाथो हाथ हो जायेगा । 

भैया - तो क्या मे अच्छे दिनो का ऐलान लगवा दू और 5-5 महिने के बटने बाले बटोने पर रोक लगबा दू । और म्हारे को मिली जिरात को बैक से हाथो हाथ निकाल डालू । फिर भाया मने जरूआ खोसो तो हुॅ नही जो दफन कफन से पहले सब कुछ लूट डालू मने ठहरा चिन्दी पन्ने बाला धीमी गति का समाचार ब्लैक इन व्हाइट साप्ताहिक सो खबरो मे ही पुरूषार्थ लुटा डालू  क्योकि भाया आजकल सुनते है जिरात भी बिगत 15-16 बर्षो से देख देख कर बट रही है अब तो रोटी भी अपने अपनो के हाथो बट रही है मुआ म्हारे को तो 22 बर्ष मे एक छदंम तक हाथ नही लगी अब तो मदमस्तो का ही कुनवा इतना बढ़ा है कि अब तो उनमे ही लूटपाट को लेकर तलवारे चल रही है । 

भैयै - अरे बाबले वक्त की नजाकत को समझ और तने भी कोई छुटभैया बन आगे की तैयारी कर जब गजनबी गौरी डच अॅंग्रेज इतने बर्षो मे कुछ नही उखाड़ पाये तो माल की कमी थोड़े ही न है कमी थारे प्रयासो मे जो तने आज तक नही कर सका कहते है आशा पर आसमान टिका है सो उपर बाले की ओर देख और माल कैसै कुट सकता है यह तजबीज खोज थारे पर भी कृपा बरसेगी और फिर थारी 7 पीढ़ी कभी राहत आफत को नही तरसेगी । थोड़ा कहा बहुत समझना और अब भूले से भी गौरी का नाम जुबान पर मत लेना तब थारी चल जायेगी वरना अभी तो कोरोना चल रहा है गर फंगस की बारी आयी तो या तो थारी महान काठी गंगा किनारे नजर आयेगी जिन्दा बचा तो फंगस के फैर मे जीते जिन्दा आॅखे निकालने तक पर बन आयेगी ।  

भैया - मने समझ लिया थारा इसारा अब मने किसी से कुछ नही बोलूगा न ही गड़े मुर्दे खोलूगा जब तक भी रहुॅगा जय जय श्री राम ही बोलूगा इतने पर तो म्हारी भी चल जायेगी और बटोने से बची बखसीस मे म्हारी भी दाल गल जायेगी सच बोल्यू तो भाया बड़ा बुरा वक्त आया है इसमे न तो कोई अपना न ही पाराया है अन्तिम समय भी जो राम नाम सत्य का सहारा था अब तो उस पर भी कोरोना किलर का साया है फिर प्रबंधन बालो से भी थोड़े ही हमारा कोई जन्म जात 36 का आंकड़ा है । जय जय श्री राम 

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