मुक्तिधाम से मशविरे की आश..............तीरंदाज ?
गौरी का फाॅरमूला भी कोरोना के आगे हुआ धड़ाम
व्ही. एस. भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
भैया - कै करू क्राइसेस प्रबंधन मे जब से गौरी महान का फाॅरमूला क्या फैल हुआ है म्हारा तो म्हारे माईबापो से विश्वास ही जाता रहा कहा तो यह गया था कि गौरी महान के फाॅरमूले के चलते अब कोरोना महान की कमर टूट जायेगी फिर नई सुबह होगी और फिर सुहानी रात आयेगी । मगर मुआ ऐसा तो कुछ हुआ नही सुना है अब तो कोरोना महान को परास्त करने शमसानो से मशविरे मांगे जा रहै है और क्रायसेस प्रबंधन को अब जान बचाने के लाले है काड़ू बोल्या की अन डाउन के चलते लगे लाॅक का फारमूला ढूढा जा रहा है इसलिये तो जिन्दा इन्सानो से लाॅक तोड़ने का फाॅरमूला पूछा जा रहा है । मगर भाया म्हारे को एक बात समझ कोणी क्यो न आबे की कि सत्ताये शमसान की रूह चलाती है या शासक ऐसे मे म्हारे को भी जिन्दा मुर्दा रूहो के मशविरे से मुखातिब होने का मौका मिल गया मगर जिन्दो की बैबसी तो मरे अधमरो का आक्रोश देख म्हारे को तो रौना आबे क्योकि एक तो हमारे गौरी महान की उसका फाॅरमूला चुरा बैभाव भदद कुटवा दी रही सही कसर मांगने को मोहताज माईबापो की मंशा ने निपटा दी अब तू ही बता हम हीन कोरोना से जान छुड़ाने क्या करे आखिर कोरोना के डर से कैसै अपने आप को मुक्त करे । बैसै भी म्हारा समृद्ध जीवन मेकाले महान की पलटन के रहते आधे से अधिक कुट घसिट अधमरा हो लिया उस पर से यह कोरोना हमारे अपने का जीना दूभर किये हुये है । गर थारे पास भी कोई फाॅरमूला है तो हाथो हाथ पहले म्हारे माईबापो को फिर म्हारे सुना बता और हम दीन हीनो की जान इस कोरोना और कोरोना से बचाने बालो की क्रायसेस से छुड़ा जिन्दा रहै तो कर लेगे प्रबंधन मर गये तो कोई बात नही कम से कम जिन्दा मरने पर तो मजबूर नही होना पड़ेगा और आये दिन हो रही अपने अपनो की मौत पर तो मातम नही मनाना पढ़ेगा । कै करे रण बाकुरो मे जो म्हारे प्राण फसे है और अब तो उ. प्र. के चुनाव भी तो सर पर खड़े है ।
भैयै - म्हारे को लागे इसी कोरोना काल मे भले ही थारी काठी को कांधा कोरोना महान का न मिले मगर थारी हरकते देख म्हारे को लागे गर थारा यही हाॅल क्रायसेस को लेकर रहा तो थारा काठी उठना पक्का समझ कै थारे को मालूम कोणी खजाने की खिड़की खोल दी गई है और सभी को थोड़ थोड़ी ही सही कमसे कम रेबड़ी बट तो रही है । और फिर थारी इस महान लोकतंत्र मे क्या औकात थारे चीखने चिल्लाने से कोई वोट थोड़े ही बरसते है थारे जैसै तो म्हारी सत्ताओ से जल यू ही बक बक करते रहते है बैसै भी हमारी प्रथमिकता अन्तिम छोर बालो की है और इन्ही की दम पर नया हिन्दुस्तान बनाने की है भले ही म्हारा राज्य छोटा हो मगर देश के दिल मे बसता है फिलहाॅल तो थारे को म्हारा चोटी का मशविरा यह है कि थारी जबानी तो म्हारे राजा ने कूट ली अब ये थारी युवा अवस्था का जनाजा है बुढ़ापा भाई मेरे बचा रख वरना इसका हाॅल भी मुफलिसी से भी बुरा होने बाला है बच्चु शमसान मे तो मतम होते है मशविरे नही मिलते भैया - मगर काड़ू तो बोल्या कि म्हारे प्रभु तो कह गये है कि शमसान मरघटा तो उसे कहते है जहां लोग मरते है मगर मुक्तिधाम तो उसे कहते है जहां लोग तरते है । तो फिर मशविरे मे चूक कहां हुई जो भाई लोग खुद के फैलाये रायते पर अब मशविरा मांग रहै है और खाल बचाने स्वच्छता अभियान छेड़ने का स्वांग रच लोगो को वर गला रहै है और शमसानो मे मशविरा मांग रहै है । थारे को कै लागे ।
भैयै - कै थारा मगज भी म्हारे माईबापो की तरह बिलकुल खाली है कै थारे को मालूम कोणी यह आपदा है जिसका प्रबंधन भी थारे जैसै मूढ़धन्नो की सलाह पर ही तो किया गया है और थारे अपने के ही अचूक आयडिये से ही तो गौरी महान के फाॅरमूले को बीच चोराहे चित किया गया है कै थारे को मालूम कोणी एक मर्तवा गौरी महान के युद्ध के मैदान मे घिर जाने पर वह महान योद्धा प्रथ्वीराज से जान बचाने गायो को आगे कर जान बचाने मे सफल हो लिया था क्योकि वह जानता था कि महान यह हिन्दु शासक गौ माता पर तीर नही चलायेगा । बस ऐसा कुछ तू म्हारा क्रायसेस प्रबंधन मान ले अच्छा हुआ तो अपना बुरा हुआ तो क्रायसेस का सो भाया अब तो ऐलान हुआ है कि क्रायसेस का प्रबधंन गाॅब गली तक पहुॅचाना है और कैसै भी हो जिन्दो को बचाना है ।
भैया - मने समझ लिया थारा इसारा लगता मेकाले महान म्हारे को तो इस जीवन मे समृद्ध जीवन न जीने का श्राफ देकर गया है इस लिये तो म्हारा शेष जीवन अब तो क्रायसेस प्रबंधन पर ही टिका है अब लाॅक का लाॅक रहै या डाउन हो ले म्हारे को क्या लेना देना फिर भाया चीखने चिल्लाने का भी क्या फायदा जब तक हमारी आसतीनो मे जयचंद रहेगे तब तक ऐसे ही जीवन का अन्त अभावो मे होना है । मगर मने एक कोसिश तो अभी भी करना चाहुॅ फिर भले ही गंगा मैया का आचमन न कर पाउ गर मशविरा मुक्तिधामो मे मांगा जा रहा है तो भाया यह उस्ताद लोग है कुछ तो बात होगी कोई तो ऐसी ताकत रूह होगी जिससे इस 21 बी सदी मे इन्है भी उम्मीद है तो फिर मने भी क्यो न उम्मीद रहुॅ सो मने भी आज से ही कई मुगालते तोड़ मेकाले महान की ही रूह को जगाउगा और उसी से समृद्ध जीवन का फाॅरमूला पूॅछ शेष जीवन को समृद्ध खुशहाॅल बनाउगा । बोल भैया कैसी रही । जय स्वराज ।

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