में मैं के चक्कर मे कही कोणी मोल न हो जाये यह जीवन
इतना हल्के मे न ले , मानव , मानव जीवन , लाखो , हजारो बर्ष की त्याग तपस्या का परिणाम है मौजूद मानव जीवन
व्ही. एस. भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा
जीवन का मूल्य आज जिस हल्के अन्दाज ले सेवा कल्याण , सर्बकल्याण का मनमाना ढोंग जन जीवन की कीमत पह चल रहा है यह शर्मनाक भी है और दर्दनाक भी फिर ऐसे लोगो से आम जीवन को अब ऐसी कोई अपेक्षा भी नही करनी चाहिए जिससे जीवन समृद्ध खुशहाॅल होता है । अगर सच कहै तो जिनके के लिये मानव जीवन एक तोहफा है बैचारे अब तो वह भी अभाव मुफलिसी बैबसी के चलते या सेवा कल्याण को टूट पढ़े गैग गिरोहबन्द लोगो के चलते यह स्वीकार तैयार है की जो मौजूद जीवन वह जी रहै है । अब तो वही मौजूद जीवन का अन्तिम सत्य है । क्योकि सामर्थ संसाधन सम्पन्न लोगो अपना कर्म और धर्म अब स्व कल्याण मे ही निहित मान चुके है जिसके दर्शन कोरोना काल मे शायद हर समझने बाले व्यक्ति को हो चुके होगे जिस तरह लोगो ने जरूरत के वक्त एक दूसरे को लूटा है कौन नही जानता और जबाबदेह लोगो कैसै मुॅह मे मुसीका लगाये चुप बैठै रहै लोगो बैबसी मे डगडग पगपग बैरहमी से लुटते रहै आज भी समाधान खोजने बालो का आलम यह है कि लोग मरे तो मरे मगर उनकी हासिल सत्ता पर कोई खतरा न आये जिसमे सबसे दुर्भाग्यपूर्ण तो यह है कि जिस कार्यपालिका पर अंगीकार के पश्चात से ही लोगो को अगाध विश्वास रहा है मगर अच्छी पोस्टिंग और मलाई काटू पदो पर आसीन होने की दौड़ मे वह भी जाता रहा कुछ शेष लोग का जमीर गर जिन्दा न होता तो इस जीवन की क्या दुरगति होती कल्पना भी नही की जा सकती बहर हाॅल इस सच्चाई को वो लोग तो समझने से रहै जो स्वयं सस्ते सड़े राशन के मोहताज है या फिर वह लोग जो अपने हुनर की पूरी कीमत बसूल मे मे जुटे है । और बोलने का सामर्थ होने के बाबजूद अपने अपने स्वार्थो को पूरा करने मे जुटे है मगर यह ठीक नही हो रहा अगर आज शेष लोगो का जीवन बैबसी मजबूरी की काठी ढो रहा है तो जल्द वह दिन भी वह लोग देखेगे जिन्है बर्बाद होता वहुमूल्य जीवन नही दिख रहा है मगर हमे यह नही भूलना चाहिए कि अगर यह जीवन सुरक्षित नही रहा तो वह जीवन भी कैसै सुरक्षित रह पायेगा जो आज अपने आप सामर्थशाली या पुरूषार्थी समझ मनमानी कर जीवन के साथ खिलबाड़ कर स्वयं को बड़ा सेबक कल्याणकारी घोषित करने मे लगा है । जय स्वराज ।

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