आधार हुआ अपंग , कैसै हो नेतृत्व निर्माण
सियासी जंग का अखाड़ा बना वैचारिक आधार
च्ही.एस. भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा म. प्र.
दल पार्टी संगठन आज की सियासत मे जो भी हो लगभग सभी का व्यक्तिगत या वैचारिक आधार अब सियासी अखाड़ा बन चुका है जहां सर्बकल्याण , जनकल्याण , जनसेवा से इतर सियासी जंग , सत्ता के लिये जंग शायद अब अन्तिम लक्ष्य रह गया है । कारण अपंग आधार के चलते अब मजबूत नेतृत्व के सभी रास्ते बन्द हो चुके है जिसमे धन बाहुबल ने तो मानो सेवा कल्याण के दफन कफन तक की तैयारी रख छोड़ी है । गाॅब गली से लेकर महाविद्यालयो मे गहरी जड़े जमा चुकी मौजूद सियासत जिसने मानो स्वस्थ नेतृत्व को अपंग बनाने का अभियान सा चला रखा है । शिक्षित समझदार युवा नेतृत्वो के नाम जिस तरह से स्वार्थवत सियासत परवान चढ़ी है लगता है अब उसके परिणाम आना शुरू हो चुके है जो सेवा कल्याण की सियासत के लिये किसी भी सभ्य समाज मे दर्दनाक ही नही शर्मनाक ही कहै जायेगे । वैचारिक आधार के नाम जिस तरह से आय दिन विचारो की होली जलाई जाती है वह किसी से छिपी नही है जिस तरह से गाॅब गली मे स्वार्थवत सियासत अब एक से बढ़कर एक नजीरे प्रस्तुत कर रही है वह भी शायद किसी से छिपी हो मगर कहते है हमारे महान लोकतंत्र मे सब कुछ जायज है सिर्फ सेवा कल्याण को छोड़कर , डर यह है कही यह लोकतंत्र के लिये श्राफ न बन जाये क्योकि गाॅब गली से लेकर महाविद्यालयो मे जिस तरह से मौजूद विचारो ने अपनी जड़े जमा रखी है उनके रहते अब कोई नया पीका नवीन सृजन के आधार या सर्बकल्याण मानव जीवजगत कल्याण के फूटे फिलहाॅल तो यह दूर की कोणी ही लग रही है जो हर सजग नागरिक के लिये चिन्ता का बिषय हो सकता है मगर समाधान नही ऐसे मे स्वच्छंद सृजनात्मक सियासत का आधार कैसै तैयार हो इस पर विचार अवश्य होना चाहिए क्योकि सेवा कल्याण के नाम जिस बैरहमी से आशा अकाक्षाये आय दिन दम तोड़ने पर बैबस मजबूर है वह मानव जगत उसके कल्याण के हित मे नही क्योकि अब अपेक्षा युवा से करने के बजाये उन सामर्थशालियो पुरूषार्थियो से की जाये जिनकी आस्था आज भी मानव मूल आधार की रक्षा को समर्पित है तभी अब मजबूत आधार के साथ स्वच्छंद नेतृत्व उभर मानव समाज को सही संदेश सटीक दिशा दे पायेगे वरना बर्तमान सामने है और भबिष्य हमारे दुरदिनो को देखने बैताब बैठा है फैसला हमे करना है कि हम हमारा और हमारे अपनो का भबिष्य कैसा देखना चाहते है । जय स्वराज ।

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