जन सरोकार से दूर जनप्रतिनिधियो की चाहत
हको को कलफते बैबस लोग
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
म.प्र. शिवपुरी बैसै भी कहते है शिवपुरी मे जो जाये वह कम है क्योकि यहां न तो कोई सुनने बाला है न ही देखने बाला अगर बैबस लाचार लोगो का कोई है तो वह सिर्फ उपर बाला है । असभ्यता मे माहिर यहां बतौर सेवक एक लम्बी चैड़ी जमात है झूठ पर झूठ माने इनकी नियती हो फिर चाहै वह बिजली सप्लाई का मामला हो या फिर मण्डी से हटाये गये सिक्योरटी गार्डो का मामला हो शिवपुरी मे तो समुचे प्रदेश से अलग निजाम का एहसास होना कोई नई बात नही अपने अपने आकाओ के नाम रौव झाड़ते इन महानुभावो को अपने अपने आला अधिकारियो का संरक्षण प्राप्त है जो आम जन को खून के आंसू रूलाने काॅफेी है दिन दिन भर रात रात भर जरा सी आंधी मे बिजली का गुल रहना जब की कोरोना कर्फयू का दौर था रात भर छोटे छोटे बच्चो की गर्मी से चीथ पुकार बुजुर्गो का कष्ट यह मानवीय बैहयाई की वो नजीरे है जिस पर मानवता भी सरमाजाये मगर दुर्भाग्य जबाबदेहो मे कोई शर्म नही बल्कि आम गरीब को हड़काना मानो इन महानुभावो को फैसन बन गया बहरहाॅल तो यही कहा जा सकता है कि है ईश्वर इन महानुभावो को सदबुद्धि दे कही ऐसा न हो कि किसी गरीब की हाॅय निकल जाये तब न तो आका काम आयेगे न ही अकड़ इसलिये गरीब की हाय के पात्र न बन संकट मे लोगो की सेवा निष्ठापूर्ण ढंग से हो मगर ऐसा होना शायद ही संभव हो मगर उम्मीद तो की ही जा सकती है ।

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