श्रेष्ठतम संस्कारो की जीवट यात्रा और सेवा कल्याण का सच


अधभुत क्षमता , सामर्थ का सियासी संघर्ष 


मंहगा पानी , हैदराबाद सी सड़क , खनन से माफिया राज का अंत 

वीरेन्द्र शर्मा 

20 जून 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 

ग्वालियर - अगर हम बात करे सेवा कल्याण की तो गर्व की बात है कि हमारे पास एक ऐसा सियासी चेहरा आज की सियासत मे मौजूद है जिसके अधभुत सामर्थ क्षमताओ की सेवा कल्याण के क्षैत्र मे गर्व से चर्चा कर सकते है उन संस्कारो की अधभुत छटा भी हम देख सकते जिन्है जीवन मे श्रेष्ठतम कहा जाता है और वह नाम श्रीमंत यसोधरा राजे सिंधिया जो फिलहाॅल म.प्र. सरकार मे कैबीनेट मंत्री है । और शिवपुरी जिले की प्रभारी मंत्री है । उनका जन्म दिन है वह दीर्घ आयु के साथ यसश्वी हो कहते अगर अहम मौको पर सार्थक जनसेवा मे समर्पित कृतज्ञा की चर्चा न हो तो यह उस शख्सियत के की कृतज्ञता के साथ अन्याय होगा । अगर एक पत्रकार होने के नाते मुझे ठीक से याद है तो आज से 25 बर्ष पूर्व जब अपनी माॅ और भाजपा की संस्थापक सदस्य भाजपा की जननी कहै जाने बाली कै. श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया की स्थापित सेवा कल्याण की विरासत को सजोने सबारने उनका हाथ बटाने सियासत मे कदम रखा तब उनके सामने माॅ से मिले संस्कार अनुरूप जन सेवा का ही कार्य था मगर कारबां आगे बढ़ता की इस बीच माॅ के चले जाने के बाद वह एकदम अकेली पढ़ गयी और इतनी बढ़ी आशा अंकाक्षाओ की जबाबदेही उन पर आन पढ़ी और उनके सियासी संघर्ष की शुरूआत भी यही से हुई जब वह पहली मर्तवा शिवपुरी से विधायक चुनी गई । तब शिवपुरी मे खनन , पत्ता , पानी , माफिया सबाब पर था शहर पेयजल , सड़क जैसी समस्याओ से जूझ रहा था । तो वही सियासी चुनौतियां भी कुछ कम न थी । मगर बगैर सिद्धान्त संस्कारो से समझौता किये उन्होने सबसे पहले खनन , पत्ता माफिया को निशाने पर लिया और स्वयं मोर्चा लेेते हुये उसका सफाया किया । पेयजल संकट के समाधान के लिये पहले संपबैलो की शहर भर मे श्रंखला फिर उस समय की सबसे मंहगी सिन्ध परियोजना जिसको उन्ही की सरकार के नगरीय प्रशासन मंत्री जयंत मलैया टूरिष्ट विलेज हाॅटल पर आयोजित भरी प्रेसकान्फ्रेन्स मे यह कह नकार चुके थे कि इतना मंहगा जल इतने छोटे से शहर को हम मुहैया नही करा सकते मगर आज शिवपुरी शहर सिन्ध का पानी पी रहा है । कभी दल के अन्दर तो कभी सियासी विरोधी यह कहते नही थकते थे कि शिवपरी की सड़के अब तो हैदराबाद की तरह होगी यह सपना भी उस जीवट संघर्ष की शख्शियत श्रीमंत यसोधरा राजे सिंधिया ने पूरा किया आज शहर की सुन्दर सड़को को देखकर कहां जा सकता है कि शहर का कायाकल्प क्या होता है । ये अलग बात है कि अपने अदभुत सामर्थ क्षमताओ का उन्है आज की सियासत मे वह मुकाम नही मिला जिसकी की वह हकदार है । मगर कहते है भाग्य से कौन जीता और हारा है । सौ बर्ष पूर्व के सेवा कल्याण की विरासत को आगे बढ़ा वह यह सिद्ध करने मे कामयाव रही की एक जनसेवक के मायने सार्वजनिक जीवन मे क्या होते है आज करोडो की लागत पुनः निर्मित भगवान सत्यानारायण ,नवग्रह हनुमान , गोबिन्द गरूण , सिद्धेश्वर , राव की बगिया मन्दिर के अलाबा सेकड़ो मन्दिरो का जीर्णोउद्वार इस बात का प्रमाण है कि अगर संस्कार श्रेष्ठ और संघर्ष की क्षमता अदभुत है तो जीवन के सरोकार स्वतः सिद्ध हो जाते है इससे आज की सियासत और सेवा कल्याण की सियासत करने बालो को अवश्य सीख लेना चाहिए । 

 

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