कल्याणकारी सामर्थ से ही संभव है , सर्बकल्याण



विकृत समाज , संस्कृति मे विवेक की दुर्दशा

कोरोना की त्रासदी प्रमाणिक प्रमाण 

वीरेन्द्र शर्मा 


विलेज टाइम्स समाचार सेवा 

जब समुचा जीवन ही स्व कल्याण का आग्रही हो जाये और स्वयं का सामर्थ सिद्ध करने मे ही सारा समय निकल जाये तो फिर ऐसे मे किससे सर्बकल्याण की उम्मीद की जा सकती है और अब तो स्वयं के सामर्थ को ही बचा पाना दूर की कोणी होता जा रहा है ऐसे मे विवेक की दुर्दशा विकृत समाज , संस्कृति के चलते होना स्वभाविक है । आज जिस तरह से सत्ता शीर्ष या सत्ता की भागीदारी की बैबसी कोरम पूरा करने के चलते सर्बकल्याण की कीमत पर स्वकल्याण मे तब्दील होती जा रही है वह जीवन सृजन संरक्षण संबर्धन कलंकारी ही सिद्ध होने बाली है । क्योकि आज जिस तरह से श्रेष्ठता और शीर्षता का पैमाना समर्थन या निर्जीव शिक्षा का आग्रही हो चुका है ऐसे सर्बकल्याण के बारे मे सोचना भी बैमानी है । नही तो जो त्राषदी कोरोना के रूप मे मानव जीवन देखी है वह उसे इस स्तर पर न देखनी पढ़ती क्योकि कोरोना काल मे जीवन को सुरक्षा देने , संकट के समय उसका सहयोग करने बाले अनगिनत जा चुकी जानो को बचाने मे सफल हो पाया न ही जान बचाने बैबसी मे लुटने बाले अपनो के ही बीच मौजूद लुटने से बच पाये इस बीच जीवोत्पार्जन को तरसते लोग अभावो मे बिलखते लोग उन संबेदनाओ के पात्र नही बन पाये जिसके की वह हकदार थे । कारण साफ है जब स्व स्वार्थ मे डूब समाज , संस्कृति विकृत हो जाये और सर्बकल्याण मे सामर्थ पुरूषार्थ करने बालो से वह समाज संस्कृति बांझ हो जाये तो ऐसा ही होता है जो सभी ने भोगा और देखा हो सकता है भबिष्य मे भी ऐसी स्थतियो का सामना समाज और संस्कृति के चलते मानव जीवन को करना पढ़े । क्योकि जो भी अब सत्ता मे होता है उसका सर्बोच्य लक्ष्य सतत सत्ता मे बने रहना होता है और उसकी सरकार सिर्फ उसी दिशा मे कार्य करती है क्योकि अब कोई भी सत्ताधारी सर्बकल्याण के सिद्धान्त की रक्षा के लिये सरकार की कुर्बानी नही देना चाहता है फिर उसके लिये उसे समाज संस्कृति ही नही मानव जीवन को ही दाॅव पर क्यो न लगाना पढ़े । मगर सच बोलू तो यह स्थति मानव ही नही समुचे जीव जगत के लिये घातक है जो किसी भी विवेकशील समाज संस्कृति के शर्मनाक ही कहा जायेगा बैहतर हो हम अपने अपने छणिक स्वार्थ छोड़ समाज संस्कृति को विकृत होने से रोकने मे अपना योगदान दे क्योकि अगर सर्बकल्याण का आग्रही कोई नही बनेगा तो फिर कल्याण सेवा बांझ विधवा तो सर्बकल्याण स्वतः ही अनाथ हो जायेगा । 

 

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