टच , गजब टेक्नोलाॅजी की गिरफत में जिंदगी .......? तीरंदाज


हजारो बर्ष बाद भी फारमूला कारगार 


व्ही. एस. भुल्ले 

19 जून 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा 

भैया- टच का कमाल देख म्हारा तो मगज सूख रहा है मनेे तो समझ ही नही पा रहा कि म्हारे आजाद भारत बर्ष मे हजारो बर्ष बाद भी टच का बैजोड़ कमाल हो रिया शै । आॅख दर्शन दिग्दर्शन के बाद अब म्हारा तो सारा मगज टच के कमाल पर ही खर्च हो रहा है कुन्नु कुनाल तो काड़ू महान बन रिया शै , आखिर सच क्या है ? सच बोल्यू तो भाया जरा से टच से अब तो सारा जहान दिख रहा है । 

भैयै - मुये बाबले कै थारे को मालूम कोणी जरा से प्रभु राम के चरण टच से माता अहिल्लया का उदधार हो लिया था बैचारी गिलहरी का पूरा का पूरा कुल ही तर लिया था जिसके निशान आज भी देखे जा सकते है प्रभु कृष्ण के स्पर्श मात्र से कूबड़ी अम्मा भी सीधी हो ली थी । असल मे म्हारे को लागे थारा ज्ञान अधुरा है इसलिये ही थारा ध्यान टच पर टिका है । 

भैया - मने तो टच स्क्र्रीन की बात कर रहा उस अलाउददीन के चिराग पर थारे से विमर्श कर रहा हुॅ जिसके बैहतर इस्तमाल से सारे कूड़े करकट तर रहै है और हर रोज नये नये पहुॅचे हुये महानुभाव प्रकट हो रहै है काड़ू बोल्या गर तने भी टच की कृपा पा लेगा तो थारा बिगड़ा रिकार्ट भी टच करते ही मुक्ति पा लेगा । फिर थारे को भी महान बनने किसी त्याग तपस्या की जरूरत पढ़ेगी रही सही चाल चरित्र की कुंडली भी अन्उरस्टुड रहेगी टच करते ही थारी महान कीर्ति सारे जहाॅ मे धूम मचायेगी और प्रमाण प्रमाणिकता की खुजली भी थारा कुछ नही उखाड़ पायेगी । 

भैयै - रहने दे बैसै भी म्हारी बैभाव पिट रही है संस्कारिक समाज मे सरेराह मिटटी कुट रही है और थारे को मशखरी सूझ रही है मैकाले की कृपा बैसै भी म्हारे पर खूब बरस रही है सो मने कै लेना देना मने तो म्हारे महान मेकाले की कृपा से ही तर जाउगा आज नही तो कल मने भी टचाटच के बीच व्यवहारिक टंच हो जाउगा । फिर लाइक वीवर पुरानी बात हो जायेगी तब म्हारी आम फट की टेक्नोलाॅजी टच को सपत्ता निगल जायेगी आखिर म्हारा भी तो कोई बजूद है । 

भैया - मने न लागे के थारे को म्हारी बात इतनी जल्द समझ आयेगी म्हारे को तो लागे गर थारा यही हाॅल रहा तो थारी काठी भी किसी छबीने मे घूमती नजर आयेगी इसलिये म्हारा मशविरा है पुरूषार्थ कर और लोग के लिये इस बात के लिये तैयार कर कि म्हारे खोये संस्कार कहां मिलेगे जिस भाव भी मिले तत्काल ले लो और अपना अपना नाम आम फट तकनीक की खोज मे स्थापित होने बाली संस्था मे दे दो इतने पर तो चल जायेगी वरना म्हारा तो जो होगा सो होगा थारी चिन्दी किसी भी कीमत पर नही बच पायेगी । 

भैयै - मुये भाई लोगो को समझाते समझाते म्हारी तो काठी सूख ली मगर सर्बकल्याण को छोड़ स्वकल्याण बालो को कौन समझाये की सेवा कल्याण ही सच्चा और अच्छा कर्म है बैसे तनिक थोड़ी उम्मीद थी मगर टच स्क्रीन के चक्कर मे अब तो वह भी जाती रही सो मने तो गज पन्नो के सपने त्याग अपनी काली पीली चिन्दी के पुख्ता इन्तजाम मे लगा हुॅ गर लगा मौका तो हाथो हाथ आम फट की ही शरण चला जाउगा और शेष जीवन सुकून शान्ति के साथ बिताउगा । 

भैया - मने भी समझ लिया थारा इसारा भैसो के आगे बीन बजाने मे खुद ही जग हसाई है इसलिये म्हारे को जो भी करना पढ़े मने तो अपना कर्म धर्म किसी भी कीमत पर निभाउगा आज नही तो कल म्हारे समृद्ध खुशहाॅल जीवन के सारथी रहे वंश को उसका हक अवश्य दिलाउगा । फिर जमाना टच का रहे या फिर आम फट का म्हारे को क्या ? काश म्हारे प्रियजन सज्जनो को सदबुद्धि आ जाये । जय स्वराज ।   

 

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