सर्बकल्याण मे बढ़ा विश्वास का संकट , जबाबदेह हुये बैलगाम
न बची समृद्ध संस्कृति , तो होगा जीवन तार तार
व्ही. एस. भुल्ले
3 जुलाई 21 - विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
आजकल सत्ता , सियासत हो या फिर सेवा कल्याण , समाज अथवा व्यापार सभी दूर अविश्वास का सन्नाटा पसरा पढ़ा है । बैलगाम जबाबदेही के बीच अगर समृद्ध संस्कृति यू ही बिलखती रही तो इतना तो तय है कि जीवन को तार तार होने से कोई नही बचा पायेगा । क्योकि दौहरा जीवन उसकी कृतज्ञता न तो तब सिद्ध सराही गयी जब जीवन के मूल्य सिद्धान्त जान पर भारी थे न ही वह भबिष्य मे किसी भी रूप मे सराही जाने बाली न ही सिद्ध होने बाली है खासकर को जो बर्तमान और भूत को तिलांजली दे बैहतर सुनहरे भबिष्य के लिये आज संघर्षरत है । फिलहाॅल सो टके सबाल तो आज यह है कि आखिर जीवन की समृद्धि , समृद्ध संस्कृति के लिये संघर्षरत वह कौन लोग है जो एक त्याग तपस्या अपने समद्ध जीवन की कुर्बानी के बल जीवन के आधार को सुनिश्चित करने बालो की कृतज्ञता पर कालिख पोतना चाहते है । अदृश्य ही सही अगर वह मानव जीवन के सत्य को नकार नये नये संस्कारो के बल किसी नयी संस्कृति को जन्म दे स्वयं को सबसे बड़ा तपस्वी सिद्ध पुरूष कौम सिद्ध करना चाहता है तो इस कुरूप संस्कृति से जन्म लेने बाला जीवन आने बाले समय मे ठीक उसी प्रकार अस्वीकार कर देगा जैसा कि आज धनबान बन महान बनने चल रहा है । कहते है कि अगर कृतज्ञता मे आस्था है तो सामर्थ अनुसार पुरूषार्थ भी सिद्ध होना चाहिए । जैसा कि मानव धर्म की रक्षा और सेवा कल्याण मे होता रहा है । इतिहास साक्षी पुरूषार्थ का मोहताज होता है न कि आर्दश्य सामर्थ का वरना नजीर कौन किसकी देगा निश्चित ही इसमे जोखिम बड़ा होता है मगर जोखिम का नाम ही सफल जीवन है । यह बात हर उस समझदार व्यक्ति को समझना चाहिए जिसकी आस्था उस महान संस्कृति संस्कार मे है जिसके लिये आदि अनादि से लेकर आज तक उसे जाना जाता रहा है और भबिष्य मे भी जाना जायेगा । क्योकि न तो तार तार बस्त्र तन ढक सकता है और न ही और न ही तार तार जीवन समृद्ध जीवन का संदेश जीव जगत को दे सकता है धन वैभव की अंधी लालसा और जीवन बढ़ा विश्वास का संकट वह नासूर है जिससे किसी भी जीवन का कल्याण संभव नही शायद इस सच को जबाबदेह समझ पाये तो यह जीवन की सबसे बढ़ी उपलब्धि होगी जय स्वराज ।

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