कंगाली के बीच वैवीनार बैठको ने बैठाला म.प्र. का भटटा
संविदा की बैबसी और प्रभारियो के भार से बिलबिलाती जनता
वीरेन्द्र शर्मा
21 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
शासकीय खजाने की कंगाली के बीच जिस तरह से वैवीनार और बैठको का दौर चल रहा है उससे कितना कितनो का भला हो रहा है यह तो सरकार के मुखिया ही जाने मगर सेवा कल्याण का जिस तरह से भटटा बैठा है सरकार स्वीकारे या न स्वीकारे मगर इसका सच अब धीरे धीरे सारे प्रदेश के सामने आने लगा है । तो वही दूसरी ओर शासन मे संविदा की बैबसी और प्रभारी व्यवस्था के भार ने समुचा सिस्टम का कचुमर बनाया है उससे अब जनता भी बिलबिलाने पर मजबूर दिखाई पढ़ती है । मगर जबाबदेहो के कानो पर जूह तक का न रैगना इस बात का प्रमाण है कि समृद्ध प्रदेश अब किस संकट से घिर चुका है । आमदनी चबन्नी खर्चा रूपया के भबर मे फसी सरकार नैया अब तक तो जैसे तैसै उधार के माल पर सेवा कल्याण और विकास के सपने साकार करने उताबली थी मगर लगता है बढ़ते खर्चो के बीच वह भी अब न काफी साबित हो रहा है मगर सरकार के धन पर रोजी रोटी चलाने बालो को क्या पता था कि एक दिन ऐसा भी होगा जब सरकार की प्रतिष्ठा धन को लेकर इतनी दयनीय हो जायेगी कि व्यापार मे घर का लगाने के बाद भी भुगतान के लिये 2-2 बर्ष इन्तजार करना पढ़ेगा । और के बाद भी उसे लगाये धन का भुगतान होगा । बहरहाॅल तो वेतन भत्तो और भुगतान के लिये जो कोहराम म.प्र. मे मचा है वह बड़ा ही डराने बाला है देखना होगा कि सरकार इससे कैसै निजात पा पाती है ।

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