लिंक पर पदमश्री , एहसास तो था अब विश्वास भी है .......? तीरंदाज
व्ही. एस. भुल्ले
12 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म. प्र.
भैया - अब म्हारे को पूर्ण विश्वास हो लिया कि यह महान राष्ट्र् बिल्कुल सही हाथो मे है । मगर कै करू आखिर भ्रम भी तो कोई चीज होबे सो अब म्हारा सारा भ्रम भी दूर हो लिया अब लिंक पर कुछ मिले न मिले म्हारे को म्हारा विश्वास अवश्य मिल गया । मगर म्हारी पीढ़ा तो बस आज भी यही है कि जीवन मे पुरूषार्थ का सम्मानित निश्चित ही गर्व गौरव की बात होती है और खासकर अपनो के हाथ पुरूषकृत होने मे व्यक्ति को गर्व और गौरव की अनुभूति भी होती है मगर कहते है असली गर्व गौरव की बात तो तब होगी जब इस महान राष्ट्र् का हर नागरिक स्वयं को गौरान्वित मेहसूस करेगा ।और यह तभी संभव है जब हम हमारी महान शिक्षा संस्कृति को अपने अपने सामर्थ पुरूषार्थ से उसे जीवंत कर मौजूद जीवन मे डाल आने बाली पीढ़ियो को विरासत मे छोड़ कर जाये । बधाई की पात्र है मौजूद सत्ता और उसका जीवट नेतृत्व जिसने एक लम्बी यात्रा पश्चात अपने सामर्थ के बल नई शिक्षा नीति का श्री गणेश किया । पढ़ाने की विधि और पढ़ने की विषय बस्तु के नाम सारा मामला उलझा पढ़ा है जो संवेदन शील विषय हो सकता है मगर असंभव कुछ भी नही ।
भैयै - आखिर कै हो लिया जो आज तने बड़ी दार्शनिक बाते कर रहा है कै अगला पदमश्री थारे को ही मिल रहा है जो तने बड़े बड़े प्रवचन दे म्हारा मन भर रहा है और सत्ता कि शान मे बड़े जोरदार कसिदे पढ़ रहा है ।
भैया - सत्ता से तो म्हारी दूर दूर तक यारी नही सो कसिदे किसकी शान मे पढ़ू मने तो इस बात को लेकर गदगद हुॅ कि कम से कम इस महान राष्ट्र् मे एक अरब अड़तीस करोड़ के बीच से निकली आवाज को कोई सुनने समझने बाला है राष्ट्र् को समर्पित कोई ऐसा तो दिल बाला है जो इस कलयुग मे भी सच समझने और उसका सम्मान करने बाला कोई तपस्वी है । जिसकी गहरी आस्था ईश्वर और जन जीवन कल्याण मे है ।
भैयै - मने जाड़ू लगता है थारे पर भी सियासत का भूत चढ़ रहा है इसलिये तने भी जय स्वराज के साथ जय श्रीराम बोल रहा है ।
भैया - तो इसमे हर्ज ही क्या प्रभु राम , प्रभु कृष्ण तो युग पुरूष ही नही स्वयं तारण हार रहै जिन्होने धर्म रक्षा , मर्यादा के लिये एक से बढकर एक कीर्तिमान मानव जीवन को छोड़ रखे है जिससे मानव जीवन की सिद्धता जीवन मे हो सके और जीवन की समृद्धि खुशहाॅली जीवन मे जन जीवन को नसीब हो सके । मगर मीठा मीठा गप गप और कड़बा कड़बा थू बालो का क्या करे जिनके पास न तो स्वच्छ मन है न ही पवित्र चित खेर ये म्हारा विषय नही ।
भैयै - लगता है अब थारे स्वराज का भूत भी अस्त की ओर बढ़ रहा है इसलिये कभी नाम तो कभी पुरूषकार जैसी उलझी बातो मे सुलझ रहा है । सियासी दौर मे भी थारे सर सर्बकल्याण का भूत चढ़ा है इसलिये हाथो हाथ काड़ू भी लिक का पता कर रहा है मने न लागे थारे जैसै चिन्दी पन्ने बाले को अब कोई पढ़ पायेगा जब तलाशेगा लिक तब तक तो भाया न जाने किसका नाम मंच से घोषित हो जायेगा ।
भैया - मने जाड़ू थारे जैसै मशखरो को जो सिर्फ और सिर्फ बिघन संतोष की ही बात करते है । न इन्है राष्ट्र् समाज से कुछ लेना देना न ही लोककल्याण से थारे जैसै लोगो का कोई बास्ता मगर सच बोल्यू तो भाया आज मने धन्य हो लिया कि कम से कम शीर्ष स्तर पर कोई तो है जिसे जमीन की गन्ध भी आती है और जौहरी इतना बढ़ा कि हीरे की कोर जमीन के अन्दर भी नजर आती है । सो भाया मने तो कुछ दिनो से प्रभु से मिले पुरूषकार से धन्य हुॅ गर म्हारा बस चलता तो लिक पर मिलते पुरूषकार को ही उस तपस्वी त्यागी पुरूष को थमा आता जिसकी निष्ठा पर लोग सत्ता की खातिर सबाल करते है । और जीवन भर की तपस्या को बैलगाम चश्मे से देखते है । जय स्वराज ।

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