सिद्ध और सिद्धता का मूल सर्बकल्याण
जन - जीवन मे उस .खण्ड , कौम की रक्षा , संरक्षण सबसे बड़ा मानव धर्म , जिसकी आस्था पुरूषार्थ सामर्थ अनुसार अनादिकाल से ही स्वकल्याण से पूर्व सर्बकल्याण मे रहा हो
आस्था को लेकर सबाल हो सकते है मगर सत्य पर नही
व्ही. एस. भुल्ले
4 जून 21 विलेज टाइम्स सेवा
कहते है कि सर्बकल्याण के संघर्ष पर विलाप वीर नही वुसदिल करते है क्योकि यह तो वह शौर्य होता है जिसे बड़े से बड़े शूरवीर भी झुककर सलाम करते है जो मानव जीवन का सच्चा सामर्थ भी है और सत्य को समर्पित पुरूषार्थ भी इतिहास भरा पढ़ा ऐसे उल्लेखो से मगर दुर्भाग्य की जब आज सर्बकल्याण के भाव से भरे पुरूषार्थ उस पुरूषार्थ के सामर्थ पर सबाल खड़े करते है तो मानव धर्म मे आस्था रखने बाले हर उस जीवन को दुख भी होता है और दर्द भी होता है खासकर संघर्ष एक ऐसी कौम खण्ड के लिये हो जिसने हजारो बर्ष की त्याग तपस्या कुर्बानियो के बल उसे निरंतर रक्षित संरक्षित किया हो सर्बकल्याण का संदेश भूखे प्यासे अभाव ग्रस्त रहकर दिया हो आज जब उस कौम खण्ड की बात आती है तो कईयेक जीवन बिचलित ही नही आक्रोसित हो जाते है आखिर क्यो ? क्या इतने बर्षो की त्याग तपस्या कुर्बानियो का कोई मूल्य मानव जीवन शेष नही रहा क्या जीवन इतना निस्ठुर क्रूर हो गया जो उसे सृजन की उस विद्या से भी दूर ले गया जिस पर सारी विद्याओ का भार टिका है । समझना होना सत्य के लिये संघर्ष मे सर्बकल्याण के प्रति संघर्षरत उन महामानवो के दर्द को जो सब कुछ सर्बकल्याण को समर्पित कर संघर्ष के मार्ग पर है रहा सबाल आस्था का तो आस्था का सीधा संबध मन , चित से जुड़ा हुआ है । जिनकी आस्था सत्य अर्थात मानव धर्म कर्म के प्रति सच्ची थी आज महाभारत , रामायण मे उल्लेखित ग्रन्थो के माध्ययम से समझा जा सकता है । मगर तब भी सत्य से सहमत असहमत और अपनी अपनी आस्था पर अडिग रहने बालो की कमी नही थी और आज भी नही मगर जब आज हम देखते है कि जरा जरा सी बातो पर विलाप कर स्वस्वार्थ के लिये गरियाने बालो ने समुची मानवता ही नही जीवन को भी कलंकित कर रखा है । अब ऐसे मे कौन सर्बकल्याण , खण्ड , कौम की रक्षा संरक्षण का ध्वज उठायेगा यह आज समझने बाली बात हर श्रेष्ठजन आमजन के लिये होना चाहिए । कहते पहले तो संघर्ष मे एक झटके मे ही जीवन लीला समाप्त हो जाती थी मगर जब आज सुरक्षित संरक्षित जन जीवन है उसके बाबजूद जीवन का विलाप समझ से परे होना चाहिए यही मानव धर्म और कर्म कहता है । क्योकि समय सभी को मौका देता है अगर मौका है तो इसकी सार्थकता सिद्ध अवश्य होना चाहिए यही सबसे बड़ी पहचान और आस्था सिद्ध होगी ऐसी आस्था हर उस जीवन को रखनी चाहिए जो खुशहाॅल समृद्ध जीवन मे आस्था रखता है । जय स्वराज ।

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