सेवा में राष्ट्र्ीय भाव अहम , बड़ी जबाबदेही - नरेन्द्र मोदी


स्वराज्य मे साधनो की पवित्रता सार्थक रही है 

व्ही. एस. भुल्ले 

31 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 


राष्ट्र् जन सेवा से जुड़ा बिषय या कोई अहम मौका देश के प्रधान मंत्री हमेशा अपने अनुभव साझा और लोगो की समझ को समझने समझाने का अवसर अवश्य सार्थक करने की पूरी कोसिश करते है मौका था आई . पी. एस. सेवा के 2019 के बैच के नव अधिकारियो के बीच संवाद का सो उन्होने जहां युवा अधिकारियो सेवा मे समझ को समझने की कोसिश की तो वह इस अवसर पर साबरमती आश्रम और स्वराज्य की चर्चा करने से भी नही चूके बल्कि उन्होने नव प्रशिक्षित सेवको को बताया की कैसै महात्मा गाॅधी जी ने सिर्फ नमक आन्दोलन को खड़ा करने अकेले कुछेक लोगो के साथ शुरूआत की और कारबां बढ़ता चला गया जिससे ब्रिटिस सरकार भी हिल गई इस अवसर पर उन्होने सेवा मे लीडर वन राष्ट्र् जन सेवा के कार्य कैसे किये जा सकते है इस प्रकाश डाला और पवित्र साध्य की प्राप्ति मे पवित्र साधनो की क्या महत्वता होती है वह गाॅधी जी के उदाहरण से समझाया । निश्चित ही यह प्रधानमंत्री जी का भाव उन्है और दृढ़ तथा संकल्पि सिद्ध करता है सियासत अपनी जगह और राष्ट्र् जनसेवा अपनी जगह यह प्रधानमंत्री जी की खासियत है कि वह अहम मुददो पर शब्दकोश के घालमेल के बजाये सीधा संवाद के हामी रहै है और आज उन्होने यही किया जो निश्चित ही एक स्वस्थ समयबद्ध परम्परा आज की सेवा सिद्ध होगी । सेवा मे अहम किरदार निभाने बाली पीढ़ी से प्रधानमंत्री जी का संवाद भले ही संक्षिप्त हो मगर इसके दुरगामी परिणाम राष्ट्र् जन हित अवश्य माहती भूमिका निभाने मे सफल सिद्ध होगे ऐसी उम्मीद प्रधानमंत्री जी के साथ हर नागरिक के अन्दर होनी चाहिए । 

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