गर खोया स्थापित विश्वास तो , कही के नही रहोगे
नही बचा आस्था का आधार तो धर्म ध्वजा कौन थामेगा
अहम अहंकार कभी किसी का सगा नही हुआ
व्ही. एस. भुल्ले
5 जून 21 विलेज टाइम्स समाचार म.प्र.
विश्वास की कीमत पर आजकल जिस तरह से अहंम अहंकार फलफूल स्वस्वार्थ के आगोस मे अठखेलिया कर स्थापित विश्वास अगूठा चिड़ा स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध करने की जिद पर अड़ा है इसके दो ही परिणाम हो सकते है दुर्योधन रावण कंश इसलिये आस्था का चुनाव भी उन्है ही करना है जो सर्बकल्याण की ध्वजा पकड़ मानव धर्म मूल्य सिद्धांत और स्वीकार्य आस्था का आधार बचाना चाहते है । कहते है समृद्ध खुशहाॅल जीवन का संघर्ष सर्बकल्याण मे कटंको से भरा रहा है । और जिस भी जीवन ने इसे स्वीकार कर अपने पुरूषार्थ सामर्थ से सिद्ध किया है वही महामानव कहलाने का उत्तराधिकारी रहा है । सौभाग्य दुर्भाग्य का जोड़ा तो अनादिकाल से रहा है सबाल सन्तुलन उसका आधार आज जब श्रेष्ठतम कृतज्ञता का दौर है ऐसे मे चंद स्वस्वार्थ मे डूबे लोगो का विश्वास से विमुख हो उसका तिरस्कार करना उसकी अनदेखी करना पाप है फिर वह सत्ता हो या सियासत या फिर अर्थ , समाज जब तक हमारी आस्था का आधार सर्बकल्याण और सर्बकल्याण के लिये अपना सब कुछ दाॅब पर लगा पुरूषार्थ करने बालो का संरक्षण समर्थन न होगा तब तक बात अधुरी रहने बाली है । जो निश्चित ही आज नही तो कल अवश्य हमारी कृतज्ञता को कलंकित अवश्य करेगी तब उसके दोषी तो हम होगे मगर उसकी कीमत हमारी आने बाली पीढ़ियाॅ चुकाने बैबस मजबूर होगी जो हमारे द्वारा हमारे अपनो की विरासत ही कही जायेगी फैसला हमे करना है । कि हम कैसा बर्तमान भबिष्य चाहते है अगर बर्तमान दौर मे जीवन निर्वहन के साथ सर्ब कल्याण की संस्कृति संस्कारो का समावेश जीवन मे होता है यह मानव जीवन की बड़ी उपलब्धि होगी क्योकि शेष नसमझ जीवन से कोई बड़ी उम्मीद रखना बैमानी होगी जो जीवन आज भी मानवीय संस्करो का मोहताज है ऐसे बड़ी जबाबदेही उस संस्कारिक जीवन की जिसमे सर्बकल्याण की समझ के साथ जबाबदेही का ज्ञान हो वह आम जीवन या खास जीवन जो भी हो उसे इस सत्य को समझना आज आवश्यक है । मगर दुर्भाग्य जीवन स्वकल्याण के संघर्ष से बाहर देखना नही चाहता जो मानव जीवन के साथ बड़ा घात हो सकता है बैहतर हो हम श्रेष्ठजनो के साथ खड़े रहे और उस धर्म ध्वजा के सारथी बने जिसे मानव धर्म कहते है जिसके लिये महाभारत , राम रावण , युद्ध हुआ और जन , जीवन के साथ सर्बकल्याण का सत्य स्थापित हुआ यही मानव जीवन का सत्य है और उसके जीवन की सच्ची कृतज्ञता है । इस सत्य को अस्वीकारना मानव जीवन की बड़ी भूल तो होगी ही और मिले अवसर के साथ घात फैसला हमे करना है । जय स्वराज ।

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