सर्बकल्याण को , कृतज्ञ तपस्वी जीवन पर कुण्ठाओ का प्रहार


 निष्ठा की प्रमाणिकता अनुभूति मे है आरोप प्रत्यारोप में नही 

असाधारण आस्था का साधारण आकलंन अनुचित 

व्ही. एस. भुल्ले 

6 जून 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा 


यह सही है कि समृद्ध देश कौम को एक मर्तवा फिर से आगे बढ़ा उसकी प्रमाणिकता सिद्ध करने के तौर तरीको पर समझ सोच अनुसार सबाल हो सकते है मगर निष्ठा पर संदेह नही होना चाहिए क्योकि निष्ठा की प्रमाणिकता अनुभूति मे निहित होती है जो आज सिद्ध होती दिखाई पढ़ रही है मगर इसकी अनुभूति भी सिर्फ उन लोगो को हो सकती है जिसका सर्बकल्याण मे विश्वास हो देश की शीर्ष सत्ता से हतोत्साहित स्वकल्याण मे सिद्ध लोगो के बीच सबाल हो सकते है या फिर समझ सोच के अभाव मे लोग अपने अपने लक्ष्यो को सामने रख आरोप प्रत्यारोप कर सकते है मगर मानव धर्म कहता है कि अगर सर्बकल्याण की सार्थक बात हो तो स्वार्थो को दर किनार कर सेवाकल्याण के साथ अपनी आस्था आधार को जोड़ने मे कोई हर्ज नही यही मानव धर्म होता है । और मानव जाती का कर्म भी मगर यह भी सही है कि अगर कोई असाधारण मानव कृतज्ञता के मार्ग पर त्याग तपस्या पुरूषार्थ कर रहा है तो उसकी सराहना अवश्य होनी चाहिए देश से विदेशो तक आज भारत की कीर्ति को लेकर जो चर्चा और शौर्य का प्रदर्शन है उससे लोगो का विचलित होना स्वभाविक है क्योकि यह मानव जीवन का नैसर्गिक गुण है अगर चर्चा है तो निश्चित ही मान लेना चाहिए कुछ हो रहा है फिर वह आन्तरिक हो या फिर बाह क्योकि जिस तरह सामाजिक , सांस्कृतिक व्यापारिक राजनैतिक स्तर पर घट रहा है वह कुछ को सराहनीय तो कुछ को बिचलित करने बाला हो सकता है मगर कहते बड़े पैमाने पर व्याप्त गन्दगी को समेटना उतना आसान नही होता जितना लोग समझते देश बड़ा विभिन्न भाषा संस्कृतिया बोलिया है सभी को साथ लेकर चलना उनके सहयोग से समाधान ढूढना निश्चित ही चुनौती पूर्ण कार्य है मगर हो रहा है जरूरत पढ़े तो सुधार मे कटंक बनी बाधाओ की परबाह किये बगैर आगे बढ़ना चाहिए क्योकि मानव धर्म और कर्म की रक्षा संरक्षण ही हमारी समृद्ध विरासत तथा अनादिकाल से सिद्धता की पहचान सर्ब कल्याण मे रही है जो आज हरयेक को समझने बाली बात होना चाहिए । साथ ही सत्ताओ को भी स्वयं की जन कल्याण मे निष्ठा सिद्ध करते वक्त सामथ्र्य के साथ अतिसंवेदन शील व्यवहार आम लोगो के बीच रखना चाहिए तभी हम एक शसक्त समृद्ध खुशहाॅल राष्ट्र् के साथ नैसर्गिक न्याय के सिद्धात के अनुयायी सिद्ध हो पायेगे । जय स्वराज । 


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