लूट की छूट से भगवान हुये हैरान , भक्तो की भक्ति और पुजारियो की निष्ठा पर उठे सबाल .............? तीरंदाज
निष्ठा के नाम तीनों लोको मे मचा कोहराम
व्ही.एस. भुल्ले
16 जून 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
भैया - श्रावण मास की पूर्व संध्या और भगवान भोले नाथ के पावन मास के अवसर पर तने यह क्या अर्र बर्र बक रिया शै के थारे को सावन का पावन मास और शिव भक्ति का 30 की जगह मात्र 15 दिन का भक्तिमय समय नही दिख रिया शै सो तने लूट की छूट और भक्त पुजारियो की निष्ठा पर सबाल खड़े कर रिया शै । क्या मृत प्राय समाजो के तीनो लोको मे वाक्य मे ही कोहराम मच रहा शै । म्हारे को तो पक्की खबर यह है कि कंगाल खजाने पर प्रसादी के नाम फांको का दौर चल रहा है अब न तो वह खीर मालपुओ के वह भण्डारे रहै न ही भगवान को 56 भोग खिलाने वाले जिजमान रहै सो तने काहै को माथा फोड़ी कर रहा है और बैबजह ही इस महान भक्ति योग के बीच कंटक बन बांधा बन रहा है ।
भैयै - बात तो थारी सो आने सच मगर कै करू म्हारे महान सेवक चितक का मल्टी कलर और मल्टी कलर मे दिग्दर्शित उन ब्रम्हबचनो पर ही मुर्दालोक की बात रख रहा हुॅ जहां सेवक भक्त जनो का कोरोनाकाल मे भी अर्दश्य कुंभ चल रहा है और भगवानो की आॅखो के सामने ही खुलयाम लूटपाट का खेल चल रहा है । कई बैचारे बैचारी माफियाओ के कारनामो के भेट चढ़ रहै है । मगर प्राकृतिक संपदा लूट अपना अपना घर भरने बालो के हौसले नही रूक रहै है । कोई भगवान की परसादी पर हाथ साफ कर रहा है तो कोई लोकतंत्र के भगवानो की लगौटी तक नही छोड़ रहा है सच बोल्यू तो भाया इस लूटपाट मे न तो पुजारियो के श्री मुॅख से कुछ फूट रहा है न ही भक्तो के जिन्दा जमीर से ही कोई नारा तीनो लोको मे गुजायमान हो रहा है । अब तने ही बता मने क्यो न बोल्यू म्हारे को पढ़ाई गयी एक ही बात आज भी मने याद है कि मानव को मानव जीवन मे मानव धर्म अनुरूप ही जीवन जीना चाहिए न की कभी गुलामो सा जीवन नही जीना चाहिए क्योकि प्रकृति ने हर मानव को आजाद पैदा किया है कर्म के लिये सो मानव धर्म के अनुसार उसे कर्म कर आजाद ही मरना चाहिए ।
भैयै - कर्म धर्म की बात छोड़ गर भक्त मण्डली ने गलती से भी सुन लिया तो थारी तो जय सियाराम हो ही जायेगी और जिस काली पीली चिन्दी को तने गले से लगाये घूमता है उसकी राख सियासी सर्राटे मे ढूड़ने पर भी कही नजर नही आयेगी कै थारे को मालूम कोणी लोकतंत्र के इही लोग मे गाॅब , गली के भक्तो के सहारे पुजारियो की स्थापना होनी है और भगवानो की सेवा मे भक्तजनो की पोटली ढीली होनी है देखना कैसै कैसै भण्डारे चलना है और प्रबचनो मे एक से बढ़कर एक महामण्डलेश्वर गली मोहल्लो मे प्रवचन होना है और इस मर्तवा भगवानो के दर सिर्फ सर झुकाने भर से ही काम नही चलेगा बल्कि साष्टांग पैढ़ भरना है ।
भैया - कै थारे को न लागे कि तने कुछ ज्यादा ही भक्त और भक्तिलोक की बात कर रहा है कै थारे को मालूम कोणी सतयुग मे भी कुछ ऐसी ही बात हुयी थी जब रावण ने भी अपने प्रियजन सज्जनो को संबोधित करते हुये यह बात कही थी कि आज मे जो भी हुॅ जैसा भी हुॅ अपने सामथ्र्य पुरूषार्थ के बल पर हुॅ आज जो शक्तियांॅ मेरे पास है वह मेने किसी भीख या दया मे हासिल नही की बल्कि इन्है प्राप्त करने मेने घोर तपष्या की है सो यह मेरा कर्म है और जो मे हुॅ वह मेरे कर्मो का प्रतिफल और आगे भी जो होगा वह भी मेरे कर्मो की अच्छी या बुरी परिणति होगी मगर उसमे भी मेरी ही जीत होगी क्योकि अगर इस युद्ध मे मारा गया तो जिनके हाथो भी मे मारा जाउगा जब तब उनकी कीर्ति इस पृथ्वी लोक पर रहेगी तब तक मेरा नाम भी जिन्दा रहेगा ।
भैयै - बाबले मने लागे कि थारा कुछ होने बाला है अब तो श्री पुरूषकार की अन्तिम तारिख भी निकल ली और थारी खुली लिंक भी बन्द हो ली । कास तने भी संजय के समय ही पैदा हुआ होता तो बगैर लिंक क्लिक के ही थारे को पदम मिल गया होता मगर कै करे थारे तो मन मस्तिक पर तो महान भीष्म की छाया है अगर इच्छा मृत्यु काट दू तो थारे को तो यह भी न मालूम की कलयुग मे भी लोक युग की घनघोर छाया है सो लोकतंत्र के तीनो लोकोे मे पुरूषार्थियो और सामथ्र्यशालियो की तूती बोल रही है अगर ऐसे मे लोकतंत्र के भगवानो की लुटती परसादी भण्डारो पर पुजारी भक्तो कि चुप्पी है तो इसमे आज के किसी रावण या कंश की गलती थोड़े ही न यह तो सब लोकतंत्र के प्रभुओ की माया है ।
भैया - मने समझ लिया थारा इसारा न तो भाई लोगो को अब मर्यादा पुरूषोत्तम की मर्यादा का ख्याल रहा न ही प्रभु कृष्ण की त्याग तपस्या और उन महान मानवो का ध्यान रहा जिन्होने समृद्ध जीवन के एक से एक बढ़कर एक कीर्तिमान रख छोड़े है । मगर इस कलयुग मे मने तो बाबा का कायल हुआ जा रहा हुॅ जिसके शासन मे लोक नीत के सहारे खुला ज्ञान सत्ता सिंहासन राजधर्म पालन का हाथो हाथ पा रहा हुॅ गर म्हारे को भी मौका मिला तो घन्टो का काम सेकिन्डो मे निबटाउगा अगर मानव जीवन मानव धर्म की रक्षा मे असफल रहा तो प्रभु को क्या मुंह दिखाउगा । पीढ़ियो का अन्याय सीढ़िया नही चढ़ पायेगा कुछ हो न हो म्हारे महान गौवंश सहित समस्त जीव जगत जीवन का कल्याण भले ही छणिक हो मगर जीवन मे अवश्य हर जीवन को मिले ऐसा पुरूषार्थ अवश्य दिखाउगा । जय स्वराज ।

Comments
Post a Comment