गणमंत्रणा से मेहरूम म्हारा फोन........ ? तीरदांज


मोबाइल से उम्मीद , मेल के घालमेल समझ से परे 


व्ही. एस. भुल्ले 

7 जुलाई 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा 

भैया - मने तो लागे म्हारा तो समझो बैड़ा गरग हो लिया न तो आज तक मेल का जबाब आया न ही आज तक कोई फोन की घंटी घनघनाई बस अब तो उम्मीद सिर्फ और सिर्फ म्हारे महान मोबाइल से है । शायद वह बज उठे मगर काड़ू बोल्या कि जिसको भी बुलाना था बुला लिया गया है और शफत का फाॅरमूला भी जमा दिया गया है । थारी भैंस तो पानी मे गयी समझ बैसै भाया अब तो फिल्म उद्योग मे भी किसी गाॅब गली से नही उम्दा हुनहर कलाकार कहां आ पाता है अब तो घरूघरा ही बाॅक्स आॅफिस पर नाम चमकाया जाता है सो अगर जिन्है तने भला माने उन्होने भी आज के जीवन मे जो प्रचलित है उसे ही दोहराया है तो गलत क्या ? फिर वह सियासत हो सरकार या फिर उद्योग सभी दूर गोल बन्दी का साम्राज्य फैला पढ़ा है । सो मने तो लागे अब मने अपनी काठी उठाउ और गौवंश के हक मे मने भी दो दो हाथ के लिये तैयार हो जाउ । 

भैयै - कै थारे को मालूम कोणी यह कोई फिल्म या फिल्म उद्योग का बिस्तार नही देश के विकास कल्याण के लिये मंत्रणा और पुरूषार्थ का कांरबा बन रहा है सत्ता सियासत सम्द्ध रहै उसके लिये आकड़ा फिट हो रहा है । इसलिये थारे जैसै बिघन संतोषी पर कोई संज्ञान नही हो रहा शै । 

भैया - तो क्या म्हारा शिक्षा , गौवंश की समृद्धि के लिये किया गया संघर्ष बैकार हो जायेगा और 2 करोड़ रोजगार देने का फाॅरमूला बैकार जायेगा मने भाया बगैर घातक संघर्ष के विश्व मे म्हारे महान भारतबर्ष की ध्वजा फहराने का फाॅरमूला बनाया था मगर कै करू साॅसल मीडिया पर सक्रिय उन बौद्धिक चोरो का जो फिरी मे लुटने बाली संपदा से माल चुरा अपना पैटैन्ट बताते है और मन ज्ञानियो की जमात खड़ी कर स्वयं को चित ज्ञानी सिद्ध कर जाते है । और म्हारे को ज्ञानी तो ज्ञानी चुरकुट भी पढ़ने से मुकर जाते है । अब ऐसे मे मने क्या करू । म्हारे को बढ़ी उम्मीद थी म्हारा मेल खुला न खुला स्पम रहा ,फोन बजे न बजे कभी तो मोबाइल बज ही जायेगा मगर बिस्तार की पूर्व संध्या पर मुआ वह भी न बजा आखिर म्हारे जैसै भारत बंशी का सामर्थ यू ही बैकार जायेगा । 

भैयै - हो तो थारा भी भला जाता अगर तने भी किसी गोल गिरोह बन्द संस्कृति की छत्रछाया मे गाॅब गली नगर परिषद सत्ता सियासत का भाग बन जाता मगर थारे को जीवन की आजादी समृद्धि की दरकार थी मने न लागे थारे जैसै मूड़धन्यो का आज की सियासत मे कुछ हो पायेगा ।

भैया - तो क्या मने भी गूगा बैहरा अंधा बन इस सियासत के सर्राटे मे उतर जाउ और अपने के ही बीच कितने भेश बनाउ की उनकी अगाध आस्था विश्वास म्हारे मे समा जाये और म्हारी भी घंटी बैतार की होने के बाबजूद घनाघन बज जाये । 

भैयै - मुये थारे मे यही तो खराबी है थारी तो शुरूआत ही म्हारे को असगुन लागे जो तने पते की बात करने बजाये हमेशा दिल जली बाते करता है इसीलिये तो थारा हिसाब कही  नही जमता है थारे को भी थारी जन्मपत्री चमकानी है तो दिमाग से मगज मे ताला लगा सिर्फ हा मे हा की कैसिट बजानी है गर भगवान प्रसन्न हुये तो थारी भी एक न एक दिन घन्टी अवश्य बज जायेगी और घन्टी के लिये भटकती थारी काठी भी तर जायेगी । 

भैया - मने जाड़ू म्हारी नही कोई सुनने बाला बैसै भी मने विगत बीसियो बर्षो से बैबजह गाल बजा रहा हुॅ न तो शिक्षा स्वास्थ न रोजगार सहित गौवंश कल्याण की बात किसी उचित मंच पर रख पा रहा हुॅ वह भला हो किसी साॅसल मीडिया बाले का जो उसने म्हारे को नई शिक्षा नीति मे शामिल या कटबाने के लिये राय चन्द बनने की खबर केबल कमेटी के मेल पर भिजबाने की 15 जुलाई तक भेजने की व्यवस्था करा डाली सो मेल जब पहुॅचता ही नही तो मने तो यही मेल समझियो भाया त्रिस्तरीय शिक्षा प्रणाली मे भाषा , ज्ञान , विज्ञान , गणित , व्यायाम को शामिल करा देना और 1 से 5 तक सीन पद्वति से व्यायाम , शब्द अक्षरो का उच्चारण स्थानीय भाषा के साथ राष्ट्र् भाषा मे हो जाये 5 से 8 तक इन्ही बिषयो के साथ कौशल समझ सीन प्रशिक्षण की व्यवस्था हो वाकी तो सामथ्र्य खुद ज्ञान वान होता है । उच्चस्तर पर तो ज्ञान सिर्फ राष्ट्र्भाषा संस्कुति के साथ हो और संवाद का आधार विश्व जगत मान्य तकनीक भाषा के आधार पर हो मगर हर विषय बस्तु मे हमारे महान महामानवो के जीवन परिचय उनके चरित्र उनके द्वारा ज्ञात संकलित सिद्ध बिद्या ही आधार हो तब सिर्फ म्हारी ही नही अहंम अहंकार से चूर उन मानवो की सर्बकल्याण मे ज्ञान की घंटी बज जायेगी और ज्ञान गंगा एक मर्तवा फिर से इस महान भारत की पहचान श्रेष्ठ मे सिद्ध हो जायेगी । जय जय सियाराम जय स्वराज ।  


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