21सबी सदी और जन जीवन की र्दुगति विकास हुआ धड़ाम
जीवन की बिगड़ी चाल और मातहत हुये बैलगाम
वीरेन्द्र शर्मा
28 अगस्त 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
ग्वालियर म.प्र. - गत दिनो आई आपदा का हवाई निरीक्षण हुआ जमीनी आसमानी दौरे हुये राहत के ऐलान के साथ कुछ राशन तो कुछ को नगद राशि भी नसीब हुई अगर कुछ न हो सका तो वह र्निबाध जीवन का यथोचित संचालन जो बारिस की आपदा बाढ़ के चलते तेहसनेस हो लिया न तो सुगम आबागमन हो सका न ही उस युद्ध स्तर पर जीवन को संचालित करने बाले उपक्रम जिससे जीवन फिर से रफतार पकड़ सामान्य स्थिति मे आ पाता न ही 21 बी सदी जैसी वह तत्परता जो जीवन का सहारा बन शेष समय को सुगम बना पाती यह सही है कि जो बिनाश लीली लगातार हुई बारिस ने की है उसके जख्म भरने मे समय तो लगेगा मगर जिस युद्ध स्तर पर शुरूआत होनी थी वह नही हो सकी और आम प्रभाबित जीवन सहित अन्य शेष जीवन भी प्रभावित हो रहा है जो आज के संसाधन संकल्प शक्ति पर कलंक ही कहा जायेगा अगर हम वृहत पुलो के विनास को भूल भी जाये तो जीवन प्रक्रिया को सुगम बनाने बाले कार्य तक शुरू नही हो सके फिर वह चाहै फसल सर्वे कार्य हो या फिर बारिस से छदविछद सड़के हो या फिर बिजली पानी राशन सप्लाई जो लोग अपने अपने घरौदे गबां खुले आसमान मे आ गये उनका भी कुछ नही हो सका क्योकि अब हम सिस्टम के एक ऐसे दौर मे जा पहुॅचे है जहां कार्य जल्द होने के बाबजूद कम्पियूटराइज होने के बाद लकीर के फकीर बन सिस्टम से राहत निकलने और आम जीवन को बहाल करने का मन बना चुके है हालात ये है कि जिन शहर कस्बो गाॅबो का आपस मे सम्पर्क टूट चुका है वहा भी आवागमन ठीक से बहाल नही हो सका है और यह हालत समुचे ग्वालियर चंबल की है मगर 21बी सदी के कर्णधार अभी भी किसी चमत्कार की उम्मीद मे आॅखे गड़ाये बैठै है जो शर्मनाक ही कहा जायेगा कोरोना के नाम कंकाल प्रदेश मे बाते कोई कितनी ही क्यो न करले मगर सच यह है कि जीवन बैहाल है और धन के अभाव मे कर्णधार बैलगाम सोचना होगा अभियानो मे डूबे उन महापुरूषो को कि कैसै आम जीवन को जल्द से जल्द से सामन्य किया जा सकता वरना मुफलिसी मे जीने बालो का क्या वह तो तब भी मुफलिसी भरा जीवन जी रहै थे शेष भी कट जाये तो उनके लिये कोई नई बात नही होगी विचार विकास कल्याण पुरूषो को करना है ।

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