चित , आधार से अनभिज्ञ चेतना जगाने का संकल्प , अवसर हुआ तार तार


अमृत महोत्सव को समृद्ध जीवन के अक्स , आकार , विद्या विश्वास की दरकार 

जीवन की जड़ता उसके प्रकल्प सामर्थ अनुसार पुरूषार्थ के प्रमाण उनकी सार्थक प्रमाणिकता हो सकती है आधार 

व्ही. एस. भुल्ले 


15 अगस्त 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा 

कहते है संकल्प मजबूत और साध्य की स्पष्टता संसाधनो के सामथ्र्य अनुसार स्पष्ट हो तो परिणाम भी प्रमाणिक होते है फिर क्षैत्र जो भी हो खुशी की बात है कि आजादी के 75 वे बर्ष मे अमृत महोत्सव की बात हुई है मगर शुरूआती संदेश मे जिस तरह की विवसता बिखरापन सभी का साथ , सभी का विश्वास , सभी के प्रयास के बीच दिखी वह निश्चित ही सात्विक मंशा के बाबजूद निर्रथक दिखी उसने आम जीवन को भले ही बिचलित किया हो मगर भाव तो एक ही है जीवन की समृद्धि सामर्थ पुरूषार्थ की परीक्षा और ऐसा मानव जीवन पुरूषार्थियो के बीच होना भी चाहिए क्योकि जीवन मे कृतज्ञ जीवन की कृतज्ञता का इससे प्रमाणिक प्रमाण का और कोई दूसरा पैमाना हो भी नही सकता है । खास कर जबकि स्थिति मे तब निजाम चलाने की अनिवार्यिता आम सहमति हो और विचार , संस्कृतियां अनेक तथा पीढ़ियो की वह शिक्षा जो 150 बर्ष मे बिलासी संकट कटंको से भरे जीवन के अलावा न तो समृद्ध खुशहाॅल जीवन दे सकी न ही उस चित को संरक्षित कर चेतन्य बना सकी जो जीवन मे खुशहाॅली समृद्धि का आधार होता है न ही वह अक्स छोड़ सकी जिसे देख जीवन अपनी समृद्धि जीवन के प्रति कृतज्ञता को सिद्ध कर सके । मगर आने बाने बाले 25 बर्षो का जो भी खाका तैयार है वह कितना सार्थक सफल होगा वह कर्म और मानव धर्म पर निर्भर करेगा क्योकि जिसकी प्रमाणिकता और प्रमाण हमारे पास 5000 बर्ष पुरानी है मगर साध्य के प्रति समर्पित जीवन इतनी लम्बी जीवन यात्रा पश्चात आज कहा खड़ा है वह समृद्ध खुशहाॅल जीवन का संघर्ष आज तक खत्म क्यो नही हो सका है आज यही संदेश स्पष्ट करने का वक्त है । सार्वजनिक जीवन सियासत सिर्फ सत्ता का ही भाग नही होती अपितु सार्बकल्याण की आग्रही भी वह मानव जीवन मे होती है और यही भाव हमारा अक्स और आधार रहा है जो हमारा गुरूर भी है और पहचान भी ये अलग समय के थपेड़ो के साथ उसने एक लम्बा सफर तय किया है मगर तासिर आज भी वही है अगर हम शिक्षा कौशल विद्या विनय विज्ञान कृषि और क्वालिटी की संस्कृति खड़ी कर पाये तो यह अमृत महोत्सव की बढ़ी उपलब्धि होगी । क्योकि कर्तव्य , समृद्ध जीवन के प्रति आम सहमति का भाव कभी शक्ति नही रहा वरण समझने समझाने का माध्यम समझ अनुसार रहा है यह जीवन की विभिन्न विद्याओ मे शामिल सिर्फ एक विद्या का भाग है और प्रेम समभाव सर्बकल्याण सेवा भाव समर्पण वह भाव जहां से उत्तम साध्य और संस्कारो की संस्कृति प्रतिपादित हुई बिबाद वहस जीवन के ही भाग है मगर समाधान जीवन की सफलता इसलिये जीवन मे साध्य लक्ष्य और साधन की स्पष्टता अहम है स्पर्शी पारदर्शी प्रमाणिकता उसका विश्वास निश्चित ही अगर मौजूद जीवन मे कर्तव्य की सार्थक प्रमाणिकता हो तो कोई कारण नही कि कोई भी संकल्प अधूरा रह पाये फिर वह समृद्ध भारत का हो या फिर जीवन का कार्य कठिन अवश्य कहा जा सकता है मगर असंभव बिल्कुल भी नही । इसलिये आम जीवन की कृतज्ञता से पूर्व खास उन जीवनो को अपनी कर्तव्य के प्रति सिद्धता सिद्ध करनी होगी जिन्है आज की व्यवस्था मे जबाबदेह माना गया है बैसै भी देश मे उगलियो पर गिने जाने बाले जिले है अगर इन जिलो मे ही कुतज्ञता प्रमाणिकता सिद्ध करने मे सफल रही तो निश्चित ही लक्ष्य सर्बकल्याण मे बौने साबित होते देर न होगी । जय स्वराज । 


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