सरकार प्रशासन पर गम्भीर आरोपो के बीच चकरघिन्नी मातहत , बाढ़ त्रासदी ने खोली पोेल


बाढ़ के जख्म कही सरकार को नासूर न बन जाये 

17 अगस्त 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 


ग्वालियर चंबल मे बारिस बाढ़ के रूप मे आयी आपदा के लिये दोषी कौन करार दिया जायेगा यह तो भबिष्य की बात है मगर इस बिभीषिका मे जो तबाही हुई है उसके जख्म लगता है इतनी जल्द भरने बाले नही चाहै वह जन तबाही हो या धन तबाही घर तबाही हो या फिर फसल पशुधन तबाही ये अलग बात है कि सरकार ने हर व्यक्ति को नुक्सान से भरपायी का आश्वासन दे रखा है तो वही प्रशासन भी युद्ध स्तर से सर्वे कार्य मे जुट चुका है तो वही राशन वितरण का कार्य भी शुरू कर दिया गया है मगर जो बड़े बड़े पुल करोड़ो की सड़को के परखच्चे उड़ गये या फिर जो बृहत पुल जल समाधि ले वह गये उनका क्या ? क्या उन्है उतनी जल्द उनके मूल असतित्व मे लाया जा सकता जो मार्ग अभी भी बन्द पढ़े है उन्है कब तक चालू किया जा सकता है जो बिजली लाइन उखड़ तास के पत्तो की तरह खेतो मे बिखरे पढे है उनमे कब तक बिधुत प्रवाह हो पायेगा । यह सही तबाही बढ़ी है और जनधन का नुकसान भी बढ़े पैमाने पर हुआ है तो उतने ही बढ़े आरोप भी सरकार के उपर विपक्ष के दो दो पूर्व मुख्यमंत्रियो के भी है जिन्होने हाॅल ही मे इन क्षैत्रो का दौरा किया है और इतनी बढ़ी तबाही के लिये सीधे तौर पर सरकार को जिम्मेबार ठहराया है । अब देखने बाली बात तो यह होगी कि क्या आम पीढ़ित बन्चित के बीच शासन पहुॅच उन पीढ़ितो के आॅसू पौछ पाता है या फिर राहत का यह और आरोप का खेल सिर्फ सियासत तक सीमित होकर रह जाता है । 

Comments

Popular posts from this blog

खण्ड खण्ड असतित्व का अखण्ड आधार

संविधान से विमुख सत्तायें, स्वराज में बड़ी बाधा सत्ताओं का सर्वोच्च समर्पण व आस्था अहम: व्ही.एस.भुल्ले

श्राफ भोगता समृद्ध भूभाग गौ-पालन सिर्फ आध्यात्म नहीं बल्कि मानव जीवन से जुडा सिद्धान्तः व्यवहारिक विज्ञान है अमृतदायिनी के निस्वार्थ, निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन, त्याग तपस्या का तिरस्कार, अपमान पडा भारी जघन्य अन्याय, अत्याचार का दंश भोगती भ्रमित मानव सभ्यता