सत्ता अभियानो की जंग में कूदे सिस्टम समाधान


विधान के संरक्षण के बाबजूद मानव जीवन हुआ हलाकान  

वीरेन्द्र शर्मा 

28 अगस्त 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 


अगर यो कहै की विधान संरक्षण के बाबजूद मानव जीवन की मूल आत्मा जिस तरह से लहुलुहान हो हलाकान हो रही वह भी सेवा कल्याण के नाम तो ऐसी स्थिति को मानव जीवन मे सुखद नही कहा जा सकता न ही इसे मानव धर्म रक्षा मे पुरूषार्थ मगर यह सब आज की स्थति सत्ता अभियानो के लिये एक अचूक अस्त्र साबित हो रहा है और इसिलिये सत्ता को लालाहित लोग विधान की परवाह किये बगैर सिस्टम समाधान का दुरूपयोग कर एक ऐसी स्थिति बना देना चाहते है जिससे सिर्फ और सिर्फ सत्ता का तो कल्याण हो मगर सत्ता सिहासन तक पहुॅचाने बाले सिर्फ एक माध्यम सेवा कल्याण से जुड़ी कई संस्थाये आज अपने ही अस्तित्व को लेकर स्वयं पर सबाल करती होगी कि क्या उनका मूल कर्तव्य अब यही बचा है क्या उनका सेवा कल्याण मे अब कोई बजूद शेष नही रहा जो बैठक और अभियानो का भाग बन अपने मूल दायित्वो से इतर होते जा रहै है मगर सत्ता अभियानो या स्वार्थ अभियानो का इससे क्या लेना देना उन्है सिर्फ सत्ता और सत्ता ही सबसे बड़ा सेवा कल्याण है भगवान ऐसी लोगो को सदबुद्धी दे वरना खून पसीने बना यह स्वराज ककहरा कही बिखर न जाये और आम जीवन बैहाल हो अपने हक के संसाधनो से दूर न हो जाये जो उसके समृद्ध जीवन के सारथी है । 

 

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