ऐतिहासिक बर्ष मे बारिस का बटांढार ............? तीरंदाज
अज्ञानी अहंम और तबाही से मचा हाहाकार
व्ही. एस. भुल्ले
6 अगस्त 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
भैया - ज्ञानी से ज्ञानी मिले कर कर लम्बे हाथ । जीवन झुण्ड मे वह रहै जिसे हो जिन्दा रहने की आस । बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसै पेड़ खजूर पंछी को छाया नही फल लागे अति दूर भैयै - चुप कर कै तने इस तबाही मे बच्चे की जान ही लेकर मानेगा । लगता है इस भीषण तबाही को लेकर तने कुछ ज्यादा ही भावुक हो लिया । कै थारे को मालूम कोणी जीवन बचाने उड़न खटोलो से तबाही का सर्वे शुरू हो चुका है तो दूसरी ओर हमारे जांबाज वीरो का जान बचाओ मिशन म्हारे क्षैत्र मे पूर्ण हो लिया है भीषण बारिस मे बादलो का सीना चीर घनघनाते उड़न खटोलो पर तैनात वीरो ने चुन चुन कर जान बचायी है कोई बाढ़ की तबाही मे खुद को बैबस न समझे इसलिये पूरी की पूरी प्लाटून जान बचाने मे लगाई है ।
भैया - तो क्या मिशन कम्पलीट हो लिया है और तबाही का सर्बे शुरू हो लिया है ।
भैयै - तने तो बाबला शै कै थारे को मालूम कोणी इस समय संकट और कंटको का दौर चल रहा है म्हारा तो पूरा का पूरा कुनवा जान बचाने निकल पढ़ा है । सुना है कब्रिस्तान से लेकर शमसान तक मे भी भीषण बारिस से खलबली है तो वही उफनती नदियां ज्ञानी अज्ञानी अहंकारियो के मुगालते दूर करने मे जुटी है ऐसे मे जीवन से द्वेष कौन कर रहा है म्हारी तो समझ से परे है । इसमे बैचारे निरीह जीवन का क्या गुनाह है
भैया - मने तो बोल्यू जब तक म्हारे राहुल बाबा और मोदी महान है तब तक म्हारे को तो काई चिन्ता कोणी । म्हारे को तो इस भीषण तबाही मे अब तो कुछ जुमले ही फिलहाॅल ढाढस बंधा रहै है और जीवन क्या है उसके नुख्शे फोकट मे ही हाथ आ रहै है । जहां मिलेगी भरी परात , वही नाचूगी सारी रात । आॅखे न माखे और कुआ मे झाके ।
भैयै - मने तो लागे ज्ञानियो की जमात मे रह म्हारे को लागे तने तो फ्री हो लिया इसलिये सतयुग द्वापर की बाते तने कलयुग मे कर रिया शै । कै थारे को मालूम कोणी कौम का नोचना तो पैड़ पशु पक्षियो जानवरो तक मे बंचित है मगर सृष्टि मे सर्बोच्य जीवन का स्थान रखने बाली कौम मे कहां से फिट हो ली । सच बोल्यू तो हर क्षैत्र मे नोचना नोचना का खेल चल रहा है भले ही खुद का पैट का पैट भरा हो मगर जीवन सात पीढ़ी की व्यवस्था करने मे लगा है ।
भैया - तो क्या मने भी पशु यौनी मे नाम लिखबा आउ और अपनी इस मानव यौनी को पशुवत संस्कार से ही धन्य कर जाउ क्यो म्हारे को न लागे कि अब इतने बढ़े बिगाड़ पर कोई सुधार होने बाला है कभी आंधी तूफान तो कभी सूखा बारिस भूकंप बाढ़ जैसी आपदाओ से अब जीवन सुरक्षित रहने बाला है क्योकि इस अर्थ युग मे तो सारे के सारे जीवन सरोकार बैसै भी वह रहै है और मानव जीवन के सारे कर्तव्य अब स्वार्थो के सग हो लिये है सो म्हारे मगज बोले कल से जय जय श्री राम प्रभु अब तो आप ही करो इस मानव जीवन का कल्याण । इतने पर तो म्हारी काठी ओर 10 20 बर्ष खिसक जायेगी वरना मशखरो के बीच इसी तरह धक्के खायेगी । जय स्वराज ।

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