द्रौह पर उतारू वृति , समृद्ध जन जीवन पर बड़ा संकट


एकोहम द्धित्तीय नास्ती , भूतो न भबिष्यति 

जीवन सरोकार , सर्बकल्याण पर हाबी स्व आचरण व्यवहार 

व्ही. एस. भुल्ले 

11 सितंबर 2021 विलेज टाइम्स समाचार सेवा 


जन जीवन कल्याण समृद्धि और जीवन सरोकारो से जुड़ा क्षैत्र जो भी हो सभी दूर एक ही बीमारी नजर आती है जो अब धीरे धीरे समृद्ध जन जीवन के लिये एक बड़ा खतरा सिद्ध हो रहा है मानो आम जीवन मे मौजूद वृति अव खुलेयाम यह कह रही हो कि एकोहम द्धित्तीय नास्ति भूतो न भबिष्यति फिर वो सत्ता पद सौपान हो या फिर सियासत , समाज अर्थ हो विज्ञान व्यक्ति परिवार से लेकर समूह संगठन संस्थाये सभी प्रभावित हो रही है और जन जीवन संकट से घिरता जा रहा है ऐसे मे अब यक्ष सबाल यही है कि कौन किसको समझाये और कैसै जीवन को यह बात समझ मे आये कि जीवन के आधार क्या है कैसै समृद्ध जीवन का मार्ग प्रस्त हो सकता है । कैसै आम जीवन खुशहाॅल हो सकता है । कार्य कठिन हो सकता है मगर असंभव कतई नही मगर अब विचार भी आम जीवन को ही करना है जो एकोहम द्धितीय नास्ति के भूतो न भबिष्यति की ध्वजा थाम समृद्ध खुशहाॅल जीवन के मार्ग पर चल पढ़ा है कहते है जब सामर्थ पुरूषार्थ भी ज्ञान के अभाव मे जीवन से द्रोह पर उतारू हो जाये तो उम्मीद फिर किससे की जाये ऐसे मे सबसे बड़ी जबाबदेही उन सज्जन श्रेष्ठजनो की बन जाती है जो अनादिकाल से समृद्ध जीवन जन का मार्ग अपनी निष्ठा से प्रस्त करते रहै है और यह कार्य अब वही कर सकते है जो उन्है मानव होने के नाते करना भी चाहिए । शायद इसी उम्मीद मे नियती और जन जीवन आज भी समृद्ध जीवन की बाठ जो रहा है । जिस तरह से धंधे व्यापार , शिक्षा , स्वास्थ , सेवा , सियासत , सत्ताओ के ककहरे बन गये है और जन जीवन कल्याण या सर्ब कल्याण से इतर गैंग गिरोह बन गये या बन रहै है इससे न तो उनका न ही जन जीवन का भला होने बाला है क्योकि स्वस्वार्थ ने मानव जीवन को इस हद तक जकड़ लिया है कि वहां से आम जीवन का निकलपाना असंभव ही नही नमुमकिन सा जान पढ़ता है ऐसे जरूरत मानव जीवन के उस स्वाभिमान को जगाने की है जिसे वह चाहै अनचाहे तौर पर बर्षो पूर्व विसर्जित कर चुका है जब तक हम सृजन मे मानव जीवन की उपायदेयता स्थापित नही कर लेते तब कितनी ही सत्ताये आयेगी जायेगी मगर जन जीवन समृद्ध खुशहाॅल होगा इसकी गारंटी कोई नही दे सकता । जय स्वराज । 


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