भयमुक्त लोक - तंत्र में भड़भड़ाती आत्मा , सर्बकल्याण की , संघर्ष ने सम्हाली कमान .....................? तीरंदाज
व्ही. एस. भुल्ले
भैया - आजादी के सत्राबदी बर्ष और म्हारे प्रधान के जन्म दिवस पर बधाईया लेने देने बांटने , लिखने पढ़ने भाषण देने के बजाये के गणित .खोल रिया शै कै थारे को मालूम कोणी म्हारे महान देश मे आजादी का सत्राहब्दी बर्ष और जोर शोर से म्हारे त्याग पुरूष प्रधान जी का जन्म दिवस मन रहा है और तने संघर्ष के तराने छेड़े जा रहा है कै थारे को बधाईयो से भरा साॅसल मीडिया और गूगल गुरू पर अटे सबालो का कचरा नजर नही आ रहा है जो तने सर्बकल्याण मे संघर्ष के नये फाॅरमूले फैकै जा रहा है । मने तो बोल्यू जिस तरह म्हारे म.प्र. मे जान बचाने मंच से ही जिस तरह जनता जनार्दन को खुश करने मातहत हाथो हाथ चटक रहै है और भाई सेवा कल्याण के नाम अपना अपना घर भर रहै है यही तो सच्चा और अच्छा लोक और तंत्र ।
भैयै - मने जाड़ू तने भी विरोधियो की भाषा बोल रिया शै और शुभ बर्ष और दिन पर अर्र बर्र बोल रिया शै कै थारे को मालूम कोणी हाॅल ही मे तो लग्गर से बदल डाले फिर भी थारी छाती ठंडी होने का नाम न ले रही आखिर तने कै चाबे कै शेष बचो को भी बदल डाले ।
भैया - तने तो संघर्ष बादियो की तरह बोल रिया शै कै थारे को मालूम कोणी लोक तो आजादी के बाद से ही भय मुक्त है और तंत्र तो बैचारा अब मुक्त हो सका है उस पर भी थारे जैसै विघन संतोषी आॅख गडा़ये बैठै है ऐसे मे कैसै बनेगा महान लोकतंत्र कैसै होगी जनसेवा और होगा जनकल्याण म्हारे तो मगज से परे है मगर म्हारे को पूर्ण विश्वास है कि एक दिन म्हारा महान भूभाग अवश्य गुरू बनेगा ।
भैयै - कै थारे को मालूम कोणी कि इसी आश मे तो आजादी से लेकर आज तक न जाने कितनी पीढ़िया निकल ली मगर गिड़गिड़ाती सेवा और विलापकरते कल्याण का आजतक कुछ नही हो सका मगर आज खुशी इस बात कि है कि जिस आजादी के लिये हमारे पूर्वज जान की परवाह किये बगैर खुलकर लड़े मरे भले ही कुछ नसीब हुआ हो या न हुआ हो कम से कम आज हम भय मुक्त तो हो लिये और सेवा कल्याण के तले दबे तंत्र को भी भय से निजात मिली इससे बड़ा तोहफा और क्या हो सकता है ।
भैया - मने समझ लिया थारा इसारा कहते है संघर्ष कैसा भी हो किसी के भी साथ हो उसका परिणाम भी एक नये संघर्ष के ही रूप मे सामने आता है मगर जिस तरह से गैग गिरोहबन्द लोग लोक और तंत्र कि घेराबन्दी कर सर्बकल्याण उॅचे उॅचे ध्वज फहरा इकबाल बुलन्द करने मे जुटे है उससे आम जन जीवन का कितना लाभ होगा यह तो वही जाने मगर कुछ दिनो तक और ऐसा ही चला तो यकीन मानिये इस लोक और तंत्र के मायने ही बदल जायेगे जो न तो उन सेवको के हित मे होगा न ही जन जीवन के हित मे जिनके कल्याण की शफत हर सेवक सेवा मे जीवन खपा देता है अब उम्मीद उन सज्जन श्रेष्ठजनो से ही की जा सकती है । जय स्वराज ।

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