कृतज्ञता को खण्डित करती सियासत , सामर्थ हुआ बैलगाम
सत्य के प्रति प्रधानमंत्री की कृतज्ञता और सार्थकता
व्ही. एस. भुल्ले
20 सितंबर 21 सियासत सत्य के प्रति प्रधानमंत्री की कृतज्ञता के मायने जो भी निकाले मगर जो सार्थकता मानव जीवन के रूप मे सिद्ध हो रही है वह सार्थक ही कही जायेगी तौर तरीको को लेकर भी आरोप प्रत्यारोप हो सकते है मगर जिस बैबाकी से राष्ट्र् से जुड़े मुददो पर प्रधानमंत्री की जो राय रहती है उसकी सार्थकता को नकारना धूप रोशनी दिखाने से कम नही मंच भले ही मीडिया को हो सबाल भी मीडिया का हो मगर जिस शालिनता से वह बड़ी से बड़ी बात या राय दे जाते है वह सियासी जीवन के लिये एक नई सीख ही होती है हाॅल ही में उन्होने एक सबाल के जबाब मे कहा कि भय सार्वजनिक जीवन या व्यक्तिगत जीवन मे हर किसी को होना चाहिए फिर मे हुॅ या कोई अन्य वह यही पर नही रूके उन्होने यहा तक कहा कि सेना डर देश के दुश्मनो मे और कानून का डर हर उस व्यक्ति मे होना चाहिए जो स्वयं को कानून से बड़ा समझते इतना ही नही उन्होने एक मर्तवा यह भी कहा था कि मे न खाउगा न खाने दूगा आज यह सिद्ध है अगर सियासी आरोप प्रत्यारोप छोड़ दे तो एक भी मामला ऐसा नही जिसकी चर्चा धुर बिरोधी भी प्रमाणिकता के साथ कर सके मगर देश मे मौजूद एक सार्थक सफल जीवन के रहते अवसरो से देश की संपदा का बन्चित रह जाना दर्द की बात है यह सही है समझ अनुसार समय का जो सदउपयोग हो रहा है काश उस मुख्य धारा से और भी जीवन लाभान्वित हो पाते तो यह उस सामर्थ की भी सिद्धता होती जो सेवा कल्याण के नाम सियासी बाजार सिर्फ और सिर्फ खुद ब्रान्ड ही देखना चाहते है या फिर सामर्थ के बल पर प्रतिभाओ का दमन कर खुद श्रेष्ठ घोषित कर सिद्ध पुरूष बनना चाहते ऐसे लोगो को देश के प्रधानमंत्री से सीखना चाहिए कि श्रेष्ठतम सार्वजनिक जीवन की क्या आर्हताये होती है और कैसै सेवा कल्याण के लक्ष्य हासिल किये जाते है कैसै बगैर किसी बाद बिबाद के सार्थक लक्ष्य हासिल किये जाते है मगर जब सियासत स्वयं को श्रेष्ठ घोषित करने प्रधानमंत्री के उन सूत्रो को बिसरा जो उन्होने सिर्फ अनुभव ही नही जीवन की त्याग तपस्या से हासिल किये है और आज सिद्ध भी है ऐसे मे किसी नये मार्ग के निर्माण सिद्धता सिद्ध करने की जिदद कही आम जीवन पर भारी न पढ़ जाये आज यह सबसे बड़ी समझने बाली बात सियासत के सामर्थ को होनी चाहिए मगर कहते महात्वकांक्षा कब रूकी है जो अब रूकेगी इसलिये परिणाम क्या होगे यह तो आने बाला समय तय करेगा फिलहाॅल तो यही कहा जा सकता है कि ईश्वर आज की सियासत को सदबुद्धि दे जिससे जन जीवन का कल्याण सुनिश्चित हो सके । जय स्वराज ।

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