प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़को के घटिया निर्माण से करोड़ो की सड़के स्वाहा , गाॅब का जीवन हुआ दूभर


बर्षो से जमे गिरोहबन्द प्रबन्धन में हाफनी भरती ग्रामीण सड़के 

आकाओ के संरक्षण मे भयमुक्त अमला मनमानी पर उतारू 

20 सितंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 


म.प्र. के ग्वालियर चंबल संभाग मे हुई बारिस को भले ही सुनीयोजित ढग से तबाही त्राषदी का नाम दिया जाये मगर सच्चाई कुछ इसके उलट है देखा जाये तो करोड़ो अरबो की लागत से निर्मित या निर्माणाधीन प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़को जो हाॅल हुआ है वह किसी छिपा नही खासकर जो हालात ग्वालियर के शिवपुरी और चंबल के श्योपुर जिले मे बने है एक माह से अधिक समय निकल चुका है मगर सड़को की हालत आज भी जश की तश बनी हुई है खासकर जिन सड़को के परखच्चे उड़ चुके है या जो सड़के दल दल मे तब्दील हो आम ग्रामीण जीवन के सुविधा के नाम श्राफ बन चुकी है उनकी सुध लेने बाला कोई नही है जब की कर माह करोड़ो लाखो के रूपये के भुगतान हो रहै है तो कही कही मेन्टीनेन्स के नाम भी भुगतान हो रहै है ये अलग बात है कि नियम अनुसार हर सड़क की 5 बर्ष तक की गारन्टी होती है और सड़क खराब होने पर ठेकेदार को ही रखरखाब करना होता है मगर ठेकेदार मातहतो के संरक्षण मे या तो हीलाहबाली करते है या फिर औपचारिकता पूर्ण इतश्री कर लेते है । रहा सबाल महाप्रबंधक के रूप मे तैनात अफसरो का तो आकाओ की कृपा के चलते 2-2 जिलो का प्रभार ऐसे लोगो को सौप रखा है जो 5 - 5 बर्षो से एक ही स्थान पर डटे रह कार्यालयो मे बैठने के बजाये घरो से ही कार्यालय संचालित कर रहै है जो न तो यथा स्थित बताने कार्यालय मे मौजूद मिलते है न ही मोबाइल उठाते है ऐसे मे आग कुषक अपनी गुहार लेकर जाये भी तो कहा जाये यह सबसे बड़ा सबाल है जिसमे मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री के जन्म को सार्थक करने सुराज की शुरूआत कर रहै है । ऐसे मे सुराज के क्या मायने रहने बाले है यह समझने बाली हर उस सजग नागरिक के लिये होना चाहिए जो समृद्ध खुशहाॅल जीवन की बाट जो रहै है । 

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