गरीबों के मसीहा , महाराज माधव राव सिंधिया

 

एक समय यह नारा बड़ा मशहूर था 

वीरेन्द्र शर्मा 

30 सितंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र. 


आज उनकी पुण्यतिथि है । गरीबो के मसीहा महाराज माधव सिंधिया अब बात उनके दादा कैं श्रीमंत माधौ महाराज कि हो या फिर स्वयं कै. श्रीमंत महाराज माधव राव सिंधिया की लोगो उन्है आम भाषा में इसी तरह पुकारते थे एक समय तो यह सार्वजनिक जीवन मे नारा बन गूजने लगा मगर एक समय ऐसा भी आया कि लोगो को उस सत्य को भी स्वीकारना पढ़ा जो जीवन का सत्य है निसंदेह वह व्यक्तित्व पुण्य आत्माये आज हमारे बीच नही मगर उनकी कीर्ति आज हमारे बीच है उनके जीवन की कृतज्ञता आज हमारे बीच है अगर यो कहे कि यह मानव जीवन का सबसे बड़ा तमगा कोई उन्है सिंधिया राजवंश के उत्तराधिकारी के कारण हासिल नही था बल्कि उनके सार्बजनिक जीवन मे किये गये वह अधभुत कार्य व्यवहार के कारण हासिल था । उबड़ खबड़ पथरीली क्षैत्र को हरा भरा व जंगली इलाको सिंचाई से समृद्ध 100 पूर्व आज न नसीब होने बाली जन सुबिधाओ को क्षैत्र को लोगो मुहैया कराना फिर वह शिक्षा ज्ञान विज्ञान प्रकृति कृषि रोजगार अत्यआधुनिक सुबिधाओ को जुटाने से जुड़ी विद्याये हो या फिर लोगो के मान सम्मान से जुड़े संस्कार उन्होने क्षैत्र के लोगो वह सब कुछ मुहैया कराया जो उनकी समृद्धि कल्याण के लिये उपयुक्त था ऐसा ही पुरूषार्थ कैं श्रीमंत माधव राव सिंधिया का रहा अपने सहृदयी सरल स्वभाव और अन्तिम छोर के व्यक्ति को सत्ता तक ले जाने का जुनून देखते ही बनता था जीवन संघर्ष के बीच रातो रात किसी साधारण व्यक्ति को असाधारण कैसै बनाया जाता किसी पराये को भी कैसै अपना बनाया जाता है कैसै पद प्रतिष्ठा के झंडे सर्बकल्याण राष्ट्र्कल्याण मे गाड़े जा सकते है यह उनसे आज के नेताओ को सीखना चाहिए खेल उद्योग शिक्षण संस्थाओ से लेकर स्वास्थ आवागमन सुविधा का साम्राज्य कैसै खड़ा किया जाता है यह उन्होने अपने सार्बजनिक जीवन में सिद्ध किया है आज उनकी पुण्यतिथि है और एक समृद्ध इतिहास हमारे सामने काश उससे हम कुछ सबक ले पाये न जाने कितने पूर्व मंत्री विधायक बर्तमान नेता जिन्होने शायद ही कभी सपने मे सोचा हो वह एक अलग पहचान कायम करने मे सफल रहै है और आज भी है । ऐसी पुण्य आत्मा को नमन । 


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