बटोने मे बन्दरबाट तो जनधन पर जनदर्शन की चर्चा सरगर्म
स्वराज को आयना दिखती सियासत शर्मसार होते महान लोग
व्ही. एस. भुल्ले
29 सितंबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
आफत के नाम बटती राहत के बटोने मे बन्दरबाॅट तो वही जनधन पर जनदर्शन की चर्चाये आजकल जिस तरह से परवान चढ़ रही है वह लोकतंत्र मे आस्था रखने बालो के लिये काबिले गौर होना चाहिए । ऐसा नही कि म.प्र. मे ऐसा पहली मर्तवा हो रहा हो मगर सियासत के सिपारी किलरो क्या या तो उन्हे पावर चाहिए या फिर धन सो स्वराज को आयना दिखाने बालो का गोरखधंधा विगत 15 बर्षो से .खूब फलफूल रहा है मजे कि बात तो यह है कि भाई लोग शेर की खाल ओल सियासत के नाम मेमनो का शिकार कर खुद को जंगल राजा घोषित कर राजसी ठाट बाट से सियासत चमकाने मे मशगूल है अब सच क्या है यह तो वह चर्चाओ को सरपैर दे हवा मे उड़ने की सलाह देने बाले ही जाने या फिर सियासत मे गहरी समझ रखने बाले ही जाने मगर इतना तो सच है कि कही तो कुछ गड़बड़ है जो जनधन पर कभी सम्मेलन तो कभी जनदर्शन पर सबाल उठते है बैसै भी सियासत मे दर्शन लेने देने का मामला कभी इतना होगा किसी ने सपने मे न सोचा होगा मगर प्रभु की कृपा से खूब फल फूल रहा है । मगर उन पथराई आॅखो का क्या जो दर्शन देते देते खुशहाॅली समृद्धि के इन्तजार मे पथरा रही और उन्है अब खुद की कम आने बाली पीढ़ियो की चिंता जबदस्त सता रही धौस की सियासत मे सरेराह स्वाहा होते सियासी , जीवन के सरोकार रंभा रहै है मगर मजाल क्या जो किसी के कानो तक जू रैंग रही हो जब सियासत स्वयं स्वराज के पक्षधर को स्वीकारने तैयार नही तो वह कैसै सर्बकल्याण को आगे बढ़ा सकती है यह आज हर सियासी और आम सज्जन श्रेष्ठजनो को समझने बाली बात होना चाहिए । यह सत्य उन लोगो को भी निहारना चाहिए जो उन महापुरूषो का स्वयं को उत्तराधिकारी मान राष्ट्र् जन कल्याण की खातिर दिन रात एक करने मे लगे है । कहते है जब लोकतंत्र अपनी पहचान खोने पर बैबस मजबूर हो तो उन सज्जन श्रेष्ठजनो का जागना आवश्यक होता है जिनके कंधो पर अनादिकाल से सेवा कल्याण सर्बकल्याण का भार रहा है और समय आने पर उन्होने उसे बखूबी निभाया भी है । खास इस सच को भाई लोग समझ पाये तो यह आम जीवन की बढ़ी जीत होगी । जय स्वराज ।

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