सजृन मे मानव धर्म की रक्षा , जीवन को समृद्ध खुशहाॅल बनाने मूल्य सिद्धान्तो की श्रेष्ठता सभी की जबाबदेही
सिर्फ सत्ता , सियासत , दल संस्थाये ही सक्षम नही बल्कि श्रेष्टजनो का योगदान भी अहम
व्ही. एस. भुल्ले
6 अक्टुबर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा
राष्ट्र् तो समृद्ध खुशहाॅल तब होगा , जब आमजीवन समृद्ध खुशहाॅल होगा और यह तब होगा जब निष्ठा पूर्ण कर्तव्यनिर्वहन सृजन सिद्धान्त अनुरूप होगा मगर इसे वही श्रेष्ठ सज्जन पुरूष कर सकते जिनकी आस्था मानवधर्म रक्षा और जीवन मूल्य सिद्धान्तो मे होगी जिनकी पूर्ण आस्था सर्बकल्याण में हो क्योकि यह कार्य किसी अकेले सत्ता सियासत दल संस्थाओ के बस की बात नही जब तक जन के जन के बीच यह भाव नही आ जाता कि सृजन अनुसार मानव जीवन के क्या मायने है ओर मानव जीवन के रूप में उसके क्या कर्तव्य है तब यह संघर्ष समृद्ध खुशहाॅल जीवन के लिये अनवरत रहने बाला है 21 बी सदी मे जिस पटरी पर आज मानव जीवन दौड़ रहा हो सकता उसकी स्वकल्याण कारी प्राप्त शिक्षा के अनुरूप समृद्ध खुशहाॅल उसकी समझ अनुसार सार्थक नजर आये मगर इससे वह जीवन कभी सफल सिद्ध नही रहने बाला सच तो यह है कि भौतिक बिलासलता के आखंड मे डूबने आतुर आज का जीवन शायद किसी भी सूरत मे यह समझने तैयार नही कि समृद्ध खुशहाॅल जीवन होता क्या है समृद्धी खुशहाॅली कहते किसे है । आज सत्ता सियासत दल संस्था और समाजो को नेतृत्व देने बाले तथाकथित लोगो के अपने अपने ज्ञान विज्ञान है और प्रतिभा प्रर्दशन के मंच और संस्कुति भी अलग है ऐसे मे सिर्फ वही श्रेष्ठजन अपना अमूल्य योगदान सृजन मे सिद्ध कर मानव जीवन की उपायदेयता सिद्ध कर सकते है जो स्वतः सिद्ध है जिनकी मानव जीव जगत के कल्याण मे गहरी आस्था आज भी विपरीत परिस्थितियो के बाद भी है वरना अधंकार का शिकार आम जीवन को स्वकल्याण बस कहां ले जाकर छोड़ेगा यह कहना असंभव ही नही न मुमकिन सा जान पाढ़ता है क्योकि सत्ता सियासत दल संस्थाओ की अपनी अपनी बैबसी प्राथमिकताये है और आज लोकतंत्र मे शेष या मौजूद जीवन को लेकर भय का भाव काश इस दिशा मे लोग समझ जीवन को सार्थक सफल कर पाये तो मानव जीवन की आज के समय मे बड़ी उपलब्धि होगी वरना इतिहास इन्तजार मे इस कालखण्ड को स्थान देने जो किसी भी मानव सभ्यता के लिये श्रेयेस्कर नही कहा जायेगा जिस तरह पूर्व इतिहास के कुछ कालखण्डो को कलंक की तरह देखा जाता है कही यह काल खण्ड भी कही कलंकित न कहलाये । जय स्वराज ।

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