सत्ता की दीवाली , ये कैसी कंगाली .......शुभकामनाये ? तीरंदाज
व्ही. एस. भुल्ले
2 नबम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
भैया - दीवाले के बीच दीवाली सत्ता चकाचक सेवक चकाचक बाजार हुआ बैहाॅल अब मने कै करू म्हारे को तो प्रभु सहारे ही प्रभु आगमन का इन्तजाम करना होगा एक ओर महगांई तो दूसरी ओर कंगाली मगर मने तो शुभकामनाये देना चाहुॅ म्हारे प्रभु को जिनकी कृपा से दीवाली पर दिया जला खुशियाॅ मनाने का अवसर तो मिला खीले गुजिया सिकलपारे का दौर तो शुरू हुआ मगर इस दीवाली मे तो प्रभु से सिर्फ इतना कहना चाहुॅ कि है प्रभु राम वह तो आप ही कि आसिम कृपा है वरना आपके भक्तो ने तो हम दीन हीनो को इस पावन पर्व पर कही का नही छोड़ा आपकी मर्यादा आपका त्याग जन जन के लिये समर्पण तो आदि अनन्त है आप जो हमारी अगाध आस्था आप पर जो जन जीवन का विश्वास है वह भी अन्नत है मगर खुशहाॅल जीवन के द्रौहियो को आप दण्ड देगे ऐसा हमारा विश्वास है जो आज सेवा कल्याण के नाम आपकी कीर्ति को आपके नाम की आढ़ मे कलंकित करने मे लगे है । ये प्रभु आपने तो एक जन मात्र की शंका कुशंका को दूर करने कितना बड़ा योगदान राजा ही सम्राट के रूप मे किया जिसका आज तक कोई दूसरा उदाहरण कोई भी मानव जीवन प्रस्तुत नही कर सका प्रभु आप तो आप है आप ही कुछ कर सकते जीवन बड़ा दुश्कर होता जा रहा है न्याय का लोप और कलफली आत्माये इस बात प्रमाण है कि जीवन मे सब कुछ ठीक नही प्रभु सदबुद्धि देना ऐसी सत्ताओ को जिनकी दीवाली तो चकाचक है मगर जिस जन की दीवाली चकाचक होनी थी वहा कंगाली है बैचारा बैबस जीवन कहै तो किससे जन , जीवन द्रौहियो से यह संसार पट रहा है कैसै जीवन समृद्ध खुशहाॅल हो कैसै सभी की समृद्ध दीवाली हो यह सब प्रभु आप ही कर सकते जय जय सियाराम ।
भैयै - लगता है इस दीवाली को तने शायद दिल पर ले गया चिन्ता न कर प्रभु सब ठीक करेगे ।
भैया - चिंता म्हारे को म्हारी नही चिंता तो म्हारे को उन दीन हीनो की जो बटोने की किसी भी श्रेणी मे पात्र नही काड़ू बोल्या कि म्हारा स्टेटस तो नीले गुलाबी से भी नीचे हो लिया अब ऐसे मे बैचारो की दीवाली कैसै हो । सुनते धन गंगा पर तो बालू बालो का रेलमपेल चल रहा है सेकड़ो मीटर उचे बांचे से दो बूंद पानी भी नगर कस्बो गांबो तक नही पहुॅच रहा है ऐसे मे अब दीवाली तो दूर कि कोणी जिन्दा रहने के लाले है जब जन ही खुशहाॅल न बचेगा तो समृद्ध राष्ट्र् सेवक किसको बनाने बाले है ।
भैयै - मुये चुप कर गर किसी भक्त ने सुन लिया तो थारी तो थारी फिर तो म्हारी भी सामत आने बाली है । जिस भूभाग पर प्रभु की सबसे प्रिय गउ माता बैघरबार भटक रही हो ऐसी सत्ता सेवको से उम्मीद भाया बैमानी है । मने तो बोल्यू जो मिले उसी मे ही प्रभु के दो दीपक लगा और जमकर दीवाली मना फिर गौधन को भी तो पूजना है । इस दीवाली पटाखे न सही फलजड़ी तो फोड़ना है मने तो बोल्यू दीवाली तो हर बर्ष आयेगी मगर अहंकार की लंका जब भी जलेगी फिर रावण की लंका की तरह इस भूभाग पर कभी नजर नही आयेगी सो थोड़ा कहा बहुत समझना ।
भैया - मने समझ लिया थारा इसारा मगर कै करू मने तो देखते नही बनता इसलिये थारे से मन जन और धन की कंगाली पर बहस कर लेता हुॅ मगर सच कहुॅ कि चंद धन पिपाशुओ की दरिद्रता से सिर्फ झोपड़ी ही नही उसमे सर छिपाये वह आत्मा भी रो रही जिसकी दीवाली आज मुफलिसी मे मन रही है मगर म्हारे को म्हारे प्रभु पर विश्वास है वह अपनी जन को इस हालत मे देख जरूर ऐसे लोगो से पूछेगे जिनके कंधो पर इन दीन हीनो की सेवा कल्याण का भार उन्होने रख छोड़ा जरूरत पढ़ी तो वह ऐसे लोगो को दण्डित भी करेगे जिन्होने जन जन का सुख चैन छीन उनके खुशहाॅल जीवन को सेवा के नाम कलंकित किया है । है राम । जय स्वराज ।
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