कानून की धज्जिया उड़ाते पालनहार , सूचना देने से बचते है
शिवपुरी में सूचना प्राप्ति के लिये चक्कर लगाने साथ अपील और करना होता लम्बा इन्तजार
वीरेन्द्र शर्मा
1 दिसम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
सूचना न देने को लेकर जिस तरह से म. प्र. का शिवपुरी जिला खूखार होता जा रहा है वह इसी बात से ही स्पष्ट है कि सूचना मागने बालो को महिनो झुलाया ही नही जाता बल्कि महिनो चक्कर लगवा कभी कभी तो अपील मे जाने के बाद भी हरेसमेन्ट तक किया जाता है । जिसमे प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क ,पी. एच. ई . लोकनिमार्ण विभाग से लेकर कई ऐसे विभाग है जो जिन्होने सूचना न देने के नये नये कीर्तिमान स्थापित कर रखे । मन गणन्त फीस जमा करने की सूचना से लेकर डाक व्यवस्था की व्यवहारिक खामी का जमकर दुरूपयोग सूचना न देने को लेकर किया जाता है । जबकि हर विभाग मे सहायक सूचना अधिकारी है मगर फिर भी कार्यालीन समय मे सूचना अधिकारी के ही दर्शन हो पाते है न ही सहायक सूचना अधिकारी के बैचारे आबेदक भटक भटक कर या सूचना मांगना ही छोड़ जाते है या फिर लौटकर ही नही आते । जहां तक प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क का सबाल है तो यहां महाप्रबंक तो दौरे पर ही बने रहते है तो पी. एच. ई मे कई आवेदन अभी भी धूल खा रहै है । तो वही लोकनिर्माण का मामला तो कुछ अजीवो गरीब है जहां मंज्जा ही इतना उल्झा हुआ है कि काम सेकड़ो करोड़ से निर्मित घटिया सड़को के निर्माण का कार्य शिवपुरी लोकनिर्माण देखता है जिसके पुल पुलिया ही नही नव निर्मित सड़को के परखच्चे बारिस में ही उड़ गये तो पुल पानी वह गये जिनकी लीपा पोती जारी है । एन डी वी वित पोषित सौ करोड़ से अधिक लागत की यह परियोजना का भुगतान की प्रक्रिया भोपाल और जबलपुर से की जाती है सूत्रो की माने तो इसका मूल्यांकन करता टीम की मुखिया जो भोपाल बैठते है तो वित संबधी कार्य जबलपुर से होता है बहरहाॅल शासकीय प्रक्रिया है जहां से भी हो मगर सूचना अधिकार को लेकर जिस तरह की मनमानी इस जिले मे चल रही है उसके मायने जो भी हो मगर जो सूचनाये बाहर आ रही है वह डराने बाली है । मगर इतना तय है बर्तमान हालातो के मध्यनजर कि जो भावना सूचना अधिकार बनाते वक्त रही होगी कम से कम उसके पैमाने पर तो वह खरी नही उतर पा रही जो लोकतंत्र ही नही पारदर्शिता जैसै मूल पर व्यवस्था का कुठाराघात ही कहा जायेगा ।
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