कैश लैस की तरफ बढ़ा जन , मलाई काटता तंत्र ....? तीरंदाज
समृद्धि के नाम कंगाली की दस्तक
व्ही. एस. भुल्ले
भैया - बधाई के पात्र है हमारे तांत्रिक अर्थशास्त्री , और समृद्धि के रथ पर सबार सम्राट क्या कहानी मेरे आका कि मने तो सुनने से पहले ही धन्य हो लिया । म्हारी जन अकांक्षा क्या केश लेश के घोड़े पर सबार हुई मानो मलाई काटने बालो कि बाढ़ सी आ गई इसे ही कहते समृद्ध तंत्र अब वह लोक के बीच हो या फिर किसी भी तंत्र मे यू तो तंत्र के भी कई प्रकार होते है मगर म्हारे बालो के जो हाथ लगा वह तो धन्य कर देने बाला है अब वह कंगाली से धन धान्य कर दे या फिर धन से यह तो फूटा हमारा भाग्य है मगर सच बोल्यू तो भाया अपनो के ही बीच मने तो धन्य हो लिया । और भरी जबानी मे ही बूढ़ा हो लिया अब तो पथराई आॅखे भी कुछ न देखना चाहै क्योकि जो दिख रहा है वह किसी बुरे सपने से कम नही मगर कै करू मानव हुॅ इसलिये मनहूसियत भी नही पाल सकता सो म्हारे जैसै लोगो का जब तक समृद्ध जीवन है तो संघर्ष तो करना पढ़ेगा । और समृद्धि के इन मुजाहिदो से लड़ना होगा
भैयै - लगता है भाया थारी मुफलिसी को तने दिल पर ले गया इसलिये तने आज तीसरी लहर की पूर्व संध्या पर इस तरह की तल्ख बात कर रहा है कै थारे को मालूम कोणी बैठके का दौर शुरू हो लिया , वैवीनार , वीडियो कान्फ्रेन्स बालो को बोल दिया गया है सारे संत्री मंत्री एलर्ट मोड पर आ चुके है पूर्व तैयारियो की खाके खीचे जा चुके है । अब तैयारी सीधे कोरोना से दो दो हाथ की है । जिसकी घिग्गी हमारे चैथै स्तंभ ने उसके आने से पूर्व ही बांध डाली है । उस पर भी तने मातम पोशी कर रहा है और ईश्वर का दिया दिल छोटा कर रहा है ।
भैया - म्हारे डर अब कोरोना बोरोना का नही म्हारे को तो चिन्ता केश लेश अपना जीवन निर्वहन करने बालो कि है अब केश लेश वह स्वयं हुये या कर दिये गये या तो प्रभु ही जाने मगर जन जन की माली हालत तो आर्थिक रूप से जर्जर काठी की तरह होने बाली है आखिर नव सावंत सम्राट के करना चाहै । मने तो बोल्यू भाया जीवन बहुत छोटा है 10 $ 20 कर लू तो भाया कई बुड़ाये समृद्धि के मुगालते मे निकल लिये तो कई बचपन धक्केखाने तैयार हो चुके तो चरचराती लाखो जबानियाॅ के सपने अधंकार मे डूब लिये कै भाया भगवान इन आत्माओ को ऐसा जीवन देने बालो को माफ कर सकेगा मारी प्रार्थना है ईश्वर इन्है छमा करना तने कै कहना चाहै ।
भैयै - हर एक जीवन कर्म क्षैत्र है जिसे अपने पुरूषार्थ के बल सामथ्र्य अनुसार जीवन मे यह सिद्ध करना होता है कि वह जीवन मे मानव धर्म जीवन मूल्य के लिये कितना समर्पित और कितना बड़ा पुरूषार्थी है । मगर जन धन बल को जमुरे के खेल से सिद्ध करने बालो क्या वह तो होते ही जादुगर है जो मानव के नैसर्गिक भाव का लाभ उठा हाथो की जादुगरी से दिग्भ्रमित कर स्वयं को वड़ा जादुगर सिद्ध कर खूब वख्सीस बटौर तालिया ठुकबाते है । और खेल खत्म होते ही आम आदमी बन जाते है धन्य है यह शूर वीर जो मुंह हाथ के खेल से ही बाहबाह कमा रहै है और जन धन बल का खतरा दिखा मानव कल्याण के नये नये कीर्तिमान बना रहै है । बैसै थारे को म्हारी नैक सलाह यह है कि तने यह दीन दुनिया कि बात छोड़ और बड़े उस्तादो का खेल छौड़ कंकड़ से पैसा और पैसै से कंकड़ बनाने की कला किसी भी गली मोहल्ले के बच्चे से सीख आ इतने पर तो थारी चल जायेगी आज इन महान पुरूर्षो को न तो थारी न ही म्हारी बात कभी समझ आयेगी सच बोल्यू तो भैयै भाग्य से ही सही मलाई मे घपे ही नही डूबे है इन्है तो अब यह बाते फजूल है क्योकि हर पुरूषार्थी का कोटा सोच से अधिक मजबूत है । सो बातो के बतासो मे बात बन जाये तो तने भी बतासो के बाजार घूम आ नारा जो भी हो उसमे धर्म राष्ट्र् का उच्चारण अवश्य हो जोरजोर से लगा पक्का थारी भी कही न कही गल जायेगी नही तो हडिडया ढोती थारी काठी भी एक न एक दिन यू ही फूक दी जायेगी ।
भैया - मने समझ लिया थारा इसारा , मगर समझ शक्तियो के अधूरे ज्ञान का कै करू जो म्हारा मगज ही कुपोषण की आढ़ मे पोषित ही नही होने देता अब यह अज्ञान और अतिज्ञान का ही तो मिश्रण है जो किसी भी तंत्र मे सामथ्र्य पुरूषार्थ पर कुन्डली मारकर बैठ जाता है फिर वह शक्तियो का संचार 5 बर्षीय हो या फिर कुछ बर्षीय जब जब जिसने कर्ता बनने की कोसिस नैसर्गिक जीवन सिद्धान्त के विरूद्ध की उसकी कीर्ति का बेड़ागर्ग हुआ फिर भी स्वयं सिद्ध सामथ्र्य शाली आज भी असफल कोसिश करने मे लगे रहते है जिससे न तो उनका ही भला होता हे न ही उन लोगो का जिनके लिये वह शक्ति का केन्द्र बनते हे अब इसे नियत मान चुप बैठ लिया जाये या फिर ऐसे लोगो के खिलाफ संघर्ष किया जाये यह तो प्रभु राम ही जाने मगर मानव जीवन मे नैसर्गिक स्वभाव अनुरूप कर्तव्य विमुख होना भी उतना ही वड़ा पाप है जितना बड़ा पाप मानव धर्म मे अनादिकाल से माना गया है । है प्रभु राम ऐसे पुरूषार्थी और महापुरूष पर कृपा करना इन्है सदबुद्धि देना कही जाने अनजाने यह उस अपराध के दोषी सिद्ध हो जाये जो यह अहंम अहंकार मे अज्ञानता या किसी के फोटो बन जीवन के साथ कर रहै है । यह सही है कीर्ति की कृतज्ञता अंको मे कुछ दिन दिखे मगर अंको का आकलन मालकाना हक कब बदल जाये आप से बैहतर कौन समझ सकता प्रभु । जय जय श्री राम । जय स्वराज ।
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