कोरोना: नवम्बर दिसम्बर की संभावना से सावधानी का समय
सुशासन के बुद्धिकौशल , बैबसी से सबक लेने का वक्ज
असावधानी के चलते कही फिर न बिलखना पढ़े हमें
व्ही. एस. भुल्ले
30 नवम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा
मृत्यु के साथ जीवन का जो संघर्ष हमने मई जून मे झेला है भोगा है वह आज भी लोगो की इस्मृति में है कैसै लोगो सड़क अस्पतालो की चैखटो एम्बूलेन्सो मे दम तोड़ा है भले ही आज सही आकड़े हमारी जानकारी से कोसो दूर हो कितने बच्चो ने अपने माता पिता बहिनो ने भाई तो बिलखते बिलखते माता पिता के आगे ही बैटे बैटियो ने इस दुनिया को छोड़ा है श्मसान कब्रिस्तानो मे क्या हालात रहै कौन नही जानता हमारे संसाधन सरकारे शासन कितना कुछ कर सके सभी न देखा अगर विपक्ष की माने तो श्मसान कब्रिस्तान के आकड़े लाखो मे है । अब जब कि सरकारो का बुद्धिकौशल सामथ्र्य सबाब पर है तब समुची दुनिया के देश खबर फैलते ही संकृमित देशो की उड़ाने बन्द कर चुके है तब हमारे यहां दिशा निर्देश ही जारी हुये अर्थात जब कोरोना भारत मे अस्तित्व मे ही नही था तब भी आवश्यक दिशा निर्देश सलाह मशविरा हुआ था परिणाम कोरोना विदेश से आया समुचे देश मे कोहराम मचाया लाखो लोगो के जीवन उनके परिवारो को तबाह कर गया समुची अर्थव्यवस्था तहस नहस गया मगर पूरे दो बर्ष पूरे होने को है मगर जड़ से नही गया उससे पूर्व ही फिर से नये रूप की सुगबुहाहट ने इतना तो साफ कर दिया कि कही भगवान न करे जैसी संभावना दिख रही और कहा जा रहा है अगर जरा सी चूक हुई तो यह मान लीजिये की कही हमे वड़ी लापरवाही की बड़ी कीमत न चुकाना पढ़े । इसलिये मास्क अवश्य लगाये जिन्है वैक्सीन नही लगी है वह तत्परता से वेक्सीन अवश्य लगवा ले और भीड़ भाड़ से दूर रहते हुये हाथ धोते रहै कोरोना गाईडलाइन का पालन करते रहै । तभी हम स्वयं और अपनो के जीवन सुरक्षित रख पायेगे क्योकि कहावत है साबधानी हटी दुर्घटना घटी इसलिये हम दुर्घटना से बचाव के अपाये पहले ही कर लेते है तो यह हमारे जीवन मानव सभ्यता के लिये दूर कोणी साबित होगा । नही तो जीवन की बर्बादी कैसै होती है यह सब हम देख चुके है । जय स्वराज ।
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