गैंग गिरोहबंन्दी में बिलखते सरोकार
आधार खोते मूल्य सिद्धान्त
सत्य स्वार्थ के संघर्ष मे , सृजन हुआ बांझ
व्ही. एस. भुल्ले
1 दिसम्बर 21 विलेज टाइम्स समाचार सेवा म.प्र.
सत्य के अनुयायी समय अनुसार आज भले ही संख्या में कम हो और स्वार्थ का कांरबा भरा पढ़ा हो मगर इस संघर्ष मे जिस तरह से सृजन बांझ घोषित होने पर बैबस मजबूर वह बड़ी ही दुखद बात और सज्जन जनो को चिन्ता का विषय भी मगर जिस तरह से मानव जीवन मे गैंग गिरोहबन्दी ने अपनी पैठ जमायी है वह समृद्ध जीवन के लिये शुभ संकेत नही । मगर आज का सत्य यही है । जिसे अस्वीकार कर पाना किसी भी श्रेष्ठजन के लिये संभव नही । मगर कहते है नियती को कौन टाल सकता है । ऐसा नही कि ऐसी स्थति मानव जीवन सृजन में पहली मर्तवा बनी हो बल्कि इसे पूर्व अनादिकाल से ऐसी स्थतिया बनती बिगड़ती रही है क्योकि दुर्जनो के लिये बर्तमान श्रेयकर तो सज्जनो के लिये भूत बर्तमान भबिष्य की उनके कर्म मे प्रधानता रही है जिसके लिये ऐसे महापुरूष आज भी जाने जाते उन महा मानवो को श्रद्धा पूर्वक मानव जीवन आज भी याद करता है । मौजूद मानव जीवन मे हो रहै जीवन मूल्य सिद्धांतो उपेक्षा यह समझने काॅफी है कि आज हम बैबजह बहुत बड़ी कीमत मानव जीवन मे चुकाने के लिये अग्रसर है । हर क्षैत्र मे बिलखते सरोकार यह गबाही देने काॅफी है कि हमारा सामथ्र्य पुरूषार्थ कि दिशा और सामथ्र्यवान जीवन की श्रेष्ठता दिगभ्रमित है अज्ञानी है वह जीवन जिसे अहंकार है कि वह जीवन का श्रेष्ठतम प्रदर्शन अपने कर्तव्य निर्वहन मे कर रहा है अनुभूति के अभाव मे आशा अकांक्षा भले ही गूगी बेहरी नजर आती हो मगर वह अन्धी नही कहते मानव आॅख का अंधा तथा जन्म से गूगा बैहरा हो सकता है मगर आत्मा स्पर्श से पहचानने से विकलांग नही मगर सम्पूर्ण स्वस्थ जीवन को विकलांग समझ अपनी मनमानी करने बालो को यह नही भूलना चाहिए कि न तो वह पहले श्रेष्ठ जन इस सृष्टि के है और न ही अन्तिम असली मानव की पहचान उसकी वह कीर्ति होती है जिसे शेष मानव जीवन जन्म जन्मान्तर तक याद रखता है । काश इस सच से जीवन भिज्ञ हो निष्ठा निर्वहन पर विचार मगर कई पीढ़ियो का अन्तराल कितना श्रेयकर साबित होगा यह तो सत्ता समाज संस्थाओ की मूल आत्मा और जीवन सरोकारो से ही तय होगा जो बिलबिलाने पर मजबूर है अब विचार हमे करना है । क्योकि जो सत्ता मे आता है वह जाना नही चाहता जो आना चाहता है वह कुछ करना नही चाहता सिर्फ सत्ता के ऐसे मे कल्याण कैसै संभव होगा यह आज सभी को समझने बाली बात होना चाहिए । जय स्वराज ।
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